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आखिर क्यों सिंगापुर के इस मेट्रो स्टेशन का नाम धोबी घाट पड़ा? जानिये वजह

दुनिया में ज्यादातर जगहों के नाम उनकी ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित करते हैं। भारत के साथ-साथ अन्य देशों में भी यही होता है। लोग वर्षों पुरानी जगहों के नाम इतिहास से संबंधित चीजों से जोड़ देते हैं। ऐसा ही सिंगापुर में एक मेट्रो स्टेशन के साथ हुआ है। यहां एक मेट्रो स्टेशन का नाम धोबी घाट रखा गया है। अब सोंचने वाली बात ये है कि धोबी घाट तो भारत में पाए जाते हैं लेकिन यह नाम सिंगापुर में क्यों रखा गया।

बता दें, यही सवाल कौन बनेगा करोंड़पति में पिछले वर्ष पूछा गया था। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने हॉट सीट पर बैठे शख्स से सवाल किया था कि किस शहर के मेट्रो रेल सिस्टम में लिटिल इंडिया, चाइना टाइम, कैशयू और धोबी घाट नाम के स्टेशन हैं? इस सवाल के लिए ऑप्शन्स में क्वालालाम्पुर, हॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर और बैंकॉक दिये गये थे।

अब आप सोंच रहे होंगे कि धोबी घाट तो भारत में होता है तो फिर ऑपशन्स में भारत का नाम क्यों नहीं दिया गया। इसका जवाब है कि भारत में धोबी घाट नाम की कोई जगह हो सकती है लेकिन कोई मेट्रो स्टेशन नहीं है। मालूम हो, इस सवाल का सही जवाब सिंगापुर है। सिंगापुर में ये चारों स्टेशन मौजूद हैं।

नाम के पीछे है लंबा इतिहास

why this metro station in Singapore was named Dhobi Ghat

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धोबी घाट नामक इस जगह का लंबा-चौड़ा इतिहास रहा है। माना जाता है कि 1819 में अंग्रेज अपने साथ भारतीय सिपाहियों और धोबियों के लेकर यहां पहुंचे थे। वे अपनी सेवा के लिए इन्हें लेकर आए थे। इन लोगों ने अंग्रेजों के साथ-साथ वहां के निवासियों की भी सेवा की।

वे सुंगेइ बेरास बाशा नामक एक छोटी सी नदी के किनारे कपड़े धोया करते थे। इस नदी के नाम का हिंदी में अर्थ होता है ‘गीले चावल की नदी’। कहा जाता है कि पुराने ज़माने में इस नदी के किनारे तक नाव के जरिये गीले चावल लाए जाते थे फिर उन्हें यहीं पर सुखाया जाता था। हालांकि, समय के साथ यह नदी सूख गई और यहां बस्ती बस गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1987 में मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम के तहत इस स्टेशन का निर्माण किया गया था जिसका नाम उसके इतिहास से जोड़कर धोबी घाट रख दिया गया। गौरतलब है, सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत राजेश राय ने अपनी पुस्तक इंडियन्स इन सिंगापुर में लिखा है कि शुरुआत में भारत से आए धोबी साफ पानी की नदी के पास रहते थे, इसी वजह से आज इसे धोबी घाट एमआरटी स्टेशन कहा जाता है।

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