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इस जगह पर भगवान राम ने खाए थे शबरी के जूठें बेर, आज है पवित्र धार्मिक स्थल

भारत का इतिहास हमेशा से प्रबल रहा है। यह देश हमेशा से सार्वभौमिक भाईचारे और मानवता के संदेश को बढ़ावा देता आया है। इसका अंदाज़ा आप भगवान श्री राम से लगा सकते हैं। कहा जाता है कि प्रभु के राज में किसी को कोई परेशानी नहीं होती थी। सभी धर्मों के व्यक्ति एक साथ रहते थे। यही कारण था कि रघुकुलनंदन पूरे विश्व में विख्यात थे। जिन लोगों ने तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया महाकाव्य रामचरितमानस पढ़ा है उन्हें निश्चित ही प्रभु की महिमा के विषय में ज्ञात होगा।

उन्हें पता होगा कि कैसे प्रभु ने माता शबरी के जूठें बेर सिर्फ प्यार और प्रसाद के रुप में ग्रहण कर लिए थे। आज हम आपको माता शबरी के धाम के विषय में बताने जा रहे हैं। इस बात से तो आप सब वाकिफ ही हैं कि जब प्रभु श्री राम अपने अनुज श्री लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज में दर-दर भटक रहे थे। उस वक्त उनकी मुलाकात माता शबरी से हुई थी।

राम ने खाए जूठें बेर

जी हां वही शबरी जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी राम के इंतजार में व्यतीत कर दी। वे रोज़ इसी आस में उठती थीं कि कब आएंगे प्रभु उनके द्वार पर आएंगे। फिर एक दिन ऐसा आया जब प्रभु श्री राम अपने भाई के साथ शबरी के आश्रम में पहुंचे। इस दौरान माता शबरी ने उन्हें जूठें बेर खाने के लिए दिए थे। इन बेरों के जूठे होने का कारण यह था कि वे चाहती थीं कि भगवान राम को सिर्फ मीठे ही बेर खाने को मिले। भगवान ने शबरी की इस मातृत्व भक्ति का सम्मान करते हुए उनके जूठे बेर भी खा लिए थे। इसके बाद माता शबरी ने उन्हें पम्पा सरोवर का रास्ता बताया था जहां उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से होगी जो माता सीता को ढूंढने में मदद करेगा।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहीं पर भगवान राम की मुलाकात अपने परम भक्त हनुमान से हुई थी। हनुमान जी उन्हें अपने कंधे पर बैठाकर अंजनेय पर्वत की पहाड़ियों पर सुग्रीव के पास लेकर गए थे। यहां से माता सीता की खोज में वानरों ने भी प्रभु श्री राम का साथ दिया था।

गुजरात में बना है शबरी धाम

बता दें, जिस स्थान पर भगवान राम शबरी से मिले थे वह जगह अब गुजरात में है। इस जगह को अब शबरी धाम कहा जाता है। यह गुजरात के डांग जिले के पास अहवा-नवापुर रोड से दूर सुबीर नामक गांव से लगभग 4 किलोमीटर दूर स्थित है। पौराणिक कथाओं में इस स्थान को दंडकारण्य वन के नाम से जाना जाता था। इस मंदिर में तीन पत्थर के स्लैब हैं जिन पर राम, लक्ष्मण और शबरी बैठे थे। वहीं, शबरी धाम से महज़ 6 किमी की दूरी पर पम्पा सरोवर बना हुआ है। यहीं पर भगवान राम की मुलाकात प्रभु श्री हनुमान जी से हुई थी।

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