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150 सालों से अधिक जीते हैं इस समुदाय के लोग, 70 कि उम्र में दिखते हैं जवान, जानिये कैसे

आमतौर पर व्यक्ति की उम्र 70-85 के बीच में आंकी जाती है। लेकिन इस तथ्य को एक समुदाय के लोगों ने मिथ्या घोषित कर दिया है। पाकिस्तान के पहाड़ी इलाकों में एक ऐसा समुदाय पाया जाता है जिसमें रहने वाले लोगों की उम्र 150 साल से भी अधिक होती है।

आज हम आपको एक ऐसे समुदाय के विषय में बताने जा रहे हैं जिसमें लोग बुढ़ापे को खुद पर हावी नहीं होने देते हैं। इस समुदाय का नाम है हुंजा समुदाय। ये लोग उस वक्त चर्चा में आए थे जब लंदन के एक एयपोर्ट पर इस समुदाय के शख्स ने अपनी उम्र बताई थी।

1832 में जन्मा आदमी पहुंचा लंदन

untold story about hunza community

मीडिया रिपोर्ट् के अनुसार, साल 1984 में लंदन के हिथ्रो एयरपोर्ट पर अब्दुल मोबट नाम का एक व्यक्ति पहुंचा था। यह इंसान देखने में लंबा-चौड़ा हट्टा-कट्टा जवान लग रहा था। हालांकि, इसको देखकर कस्टम ऑफिसर उस वक्त चौंक गए जब उन्होंने मोबट के पासपोर्ट पर उसका बर्थ ईयर देखा। इसमें लिखा था कि उसका जन्म 1832 में हुआ था।

152 साल की उम्र का आदमी

इस हिसाब से उसकी उम्र 152 साल थी जिसे देखकर कोई नहीं कह सकता था कि इतना हष्ट-पुष्ट आदमी 1832 में जन्मा है। बताया जाता है साल 1984 में हांगकांग में छपे एक लेख में इस घटना का जिक्र किया गया था। इस लेख के माध्यम से लोगों को पता चला था कि जो शख्स उस दिन एयरपोर्ट पर 152 साल का होने का दावा कर रहा था वह कोई और नहीं बल्कि हुंजा था।

हुंजा या बुरुशा के नाम से हैं प्रसिद्ध

बता दें, इस समुदाय के लोग पाकिस्तान के काराकोरम माउंटेन्स की वैली में पाए जाते हैं। इन्हें हुंजा या बुरुशो भी कहा जाता है, इनकी भाषा बुरुशास्की होती है। इनकी जनसंख्या ज्यादा नहीं लेकिन ये दुनिया के सबसे अधिक उम्र तक जीने वाले व्यक्ति हैं। इनको सबसे अधिक खुश और स्वस्थ रहने वालों में गिना जाता है।

कैंसर से दूर-दूर तक नहीं है कोई नाता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज तक हुंजा समुदाय के लोगों में कैंसर की बीमारी नहीं हुई है। इनको दुनिया में कैंसर फ्री पॉपुलेशन के नाम से जाना जाता है। इस समुदाय की महिलाओं की शक्ति इतनी अधिक होती है कि वे 65 की उम्र में भी बच्चे पैदा कर सकती हैं।

सिकंदर के वशंज हुंजा

मालूम हो, मशहूर लेखक जे आई रोडाल ने 1955 में हुंजा समुदाय की जीवनशैली पर एक किताब लिखी थी। ‘द हेल्दी हुंजाज़’ के नाम से प्रकाशित इस किताब में उन्होंने इनके खान-पान से लेकर रहन-सहन तक सभी चीजों का विस्तार से वर्णन किया था। इस किताब के मुताबिक, हुंजा समुदाय के लोग खुद को अलेक्जेंटडर द ग्रेट की सेना के वंशज मानते हैं। 87 हज़ार की आबादी वाले इस समुदाय के लोग पूरी तरह से मुस्लिम हैं लेकिन पाकिस्तान के अन्य समुदायों के मुकाबले ये उनसे अधिक पढ़े-लिखे और तमीजदार हैं।

पौष्टिक आहार लेने में रखते हैं विश्वास

गौरतलब है, हुंजा समुदाय के लोगों की लंबी उम्र का कारण पता लगाने के लिए काफी शोध किए गए। इनमें से निकलकर जो एक चीज सामने आई वो ये है कि इनका खान-पान अच्छा होता है। इस समुदाय के लोग पौष्टिक आहार लेने में विश्वास रखते हैं। ये लोग अपने भोजन में कच्ची सब्जियां, फल, अनाज, मेवा, दूध, अंडा और चीज़ शामिल करते हैं। कहा जाता है कि बुरुशा साल में 2-3 महीने उपवास रखते हैं। इस दौरान वे सिर्फ जूस पीते हैं।

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