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नदी में कचरा डालने से लोगों को रोकता है ये शख्स, करता है जागरुक, पीएम मोदी भी कर चुके हैं तारीफ

इस बात से तो आप सब वाकिफ ही हैं कि हमारी करतूतों ने पर्यावरण को कितना दूषित कर दिया है। आलम यह है कि अब स्वच्छ हवा, पानी, भोजन आदि आसानी से मिलना मुश्किल मालूम पड़ता है। गांवों के मुकाबले शहरों के हाल काफी नाजुक हैं। यही कारण है कि अब नदियों का पानी पीने लायक भी नहीं बचा है। ज्यादातर नदियां अब अशुद्ध हो चुकी हैं, इनका पानी पूरी तरह से गंदा हो चुका है। यही कारण है कि लोगों को अब नदियों का पानी पीने से पहले 10 बार सोंचना पड़ता है।

बहरहाल, आज हम आपको एक ऐसे शख्स के विषय में बताने जा रहे हैं जिसने नदियों को गंदा होने से रोकने के लिए जागरुकता अभियान चलाने का फैसला किया है। उसके इस फैसले की पीएम मोदी ने भी अपने मन की बात कार्यक्रम में तारीफ की है।

हम बात कर रहे हैं चंद्रकिशोर पाटिल की। महाराष्ट्र के नासिक की गोदावरी नदी के तट पर रहने वाला यह शख्स लोगों को नदी में कचरा फेंकने से रोकता है। वह लोगों को नदियों में बढ़ने वाले प्रदूषण को लेकर जागरुक करता है। यही वजह है कि रविवार को हुए मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने चंद्रकिशोर पाटिल की तारीफ की साथ ही उनके द्वारा चलाए जा रहे जागरुकता अभियान की भी तारीफ की।

नदियों में बढ़ता प्रदूषण

अपने इस अभियान के विषय में बात करते हुए चंद्रकिशोर पाटिल बताते हैं कि उनका घर नदी के पास है। वे बचपन से देखते आ रहे हैं कि नदी का पानी दिन-प्रतिदिन रंग बदलता जा रहा है। इसका कारण है प्रदूषण। आपने अक्सर देखा होगा कि लोग पूजा-पाठ आदि से जुड़ी सामग्री को नदियों में डाल देते हैं। इन चीजों से नदियों का पानी अब खराब होने लगा है। पहले के ज़माने में लोग नदियों का पानी पीने के लिए इस्तेमाल भी करते थे लेकिन अब इस पानी को कोई हाथ भी लगाने को तैयार नहीं है।

गोदावरी नदी के जल को साफ और सुरक्षित रखने के उद्देश्य से चंद्रकिशोर पूरे दिन नदी के तट पर गले में सीटी बांधे खड़े रहते हैं। जब भी वे किसी को नदी में कचरा डालते हुए देखते हैं तो वे उसे जाकर रोकते हैं और प्रदूषण के प्रति जागरुक करते हैं। कई बार इसके लिए लोग उनसे बहस करने पर भी उतारु हो जाते हैं। लेकिन चंद्रकिशोर अपने फैसले पर अडिग रहते हुए उन्हें प्यार से प्रदूषण के विषय में समझाते हैं।

IFS ने शेयर की कहानी

बता दें, चंद्रकिशोर पाटिल की इस प्रेरणादायक कहानी को आईएफएस अधिकारी श्वेता बोद्दु ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिये दुनिया के साथ साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि, ‘मैंने इस शख्स को पूरे दिन सड़क पर हाथ में सीटी लेकर खड़े देखा है। वो लोगों को नासिक की गोदावरी नदी में प्लास्टिक की थैलियों को फेंकने से रोक रहे थे।’

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