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इस शख्स का अद्भुत कारनामा! राख से तैयार किया कोयला, औद्योगिक क्रांति के मिले संकेत

आपने कोयले से बनकर तैयार होने वाली राख के विषय में तो सुना ही होगा, कई बार देखा भी होगा। लेकिन क्या आपने कभी राख से तैयार होने वाले कोयले के विषय में सुना है? इसके अलावा आपने कभी राख से तैयार की गई बिजली के विषय में सुना है?

आपको जानकर हैरानी होगी कि ये सब कथन एकदम सत्य हैं। अब भारत में राख से भी कोयले को तैयार किया जा सकता है। इस अद्भुत कारनामें को करने वाले शख्स का नाम रामेश्वर कुशवाहै है। पश्चिमी चंपारण के कुंडिलपुर पंचायत के मंझरिया गांव के निवासी रामेश्वर ने अपने प्रयासों से इतिहास रच दिया है। उनके इस कारनामे पर सरकारी मोहर भी लग गई है। सरकार ने उन्हें राख कोयला बनाने को लेकर पेटेंट भी कर लिया है।

छोटे व्यापारों को मिलेगी राह

बता दें, एक ज़माने में रामेश्वर कुंडिलपुर पैक्स के अध्यक्ष थे। उस दौरान उन्होंने समाजसेवा से जुड़े कई तरह काम किए। अब एक बार फिर उन्होंने राख से कोयले बनाकर औद्योगिक क्षेत्र में क्रांति लाने का काम किया। उनके इस प्रयास से पश्चिमी चंपारण में बने चारकोल ब्रिक्स से लोगों के घरों में कम खर्च पर खाना बन सकेगा। इसके अलावा इस तरह के कोयले के निर्माण से बिजली और लघु उद्योगों को भी स्थापित करने में मदद मिलेगी।

सरकार ने दिया मदद का आश्वासन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामेश्वर पिछले कई वर्षओं से इसके लिए संघर्षरत थे। साल 2012 में उन्होंने पहला प्रयास किया था तब से लेकर अब तक वे निरंतर प्रयास में लगे थे। एक दिन उन्हें सफलता प्राप्त हो ही गई। वहीं, खुशी की बात ये है कि सरकार ने भी उनकी हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है।

खेतों में होगी उपयोगी

गौरतलब है, रामेश्वर ने अपनी इस तकनीक को इजात करने के प्रॉसेस के विषय में बताया कि, चारकोल ब्रिक्स को धान के भूसे, पराली और गन्ने के सूखे पत्ते को मिलाकर बनाया है। इसकी लागत काफी कम है। उन्होंने बताया कि इसे जलाने पर प्रदूषण भी नहीं होता है साथ ही किसी प्रकार की कोई गंध भी नहीं आती है। इसके अलावा कोयले के इस्तेमाल के बाद इससे निकलने वाली राख खेतों में खाद के रूप में भी उपयोगी होती है।

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