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इस भारतीय वीर ने जान पर खेलकर बचाई पाकिस्तानी लड़की की जान, युद्धग्रस्त यूक्रेन में हुई थी मुलाकात

कहते हैं नेकी कर दरिया में डाल। ऐसा ही कुछ भारते के इस वीर सपूत ने कर दिखाया है। इसने अपने कृत्य से भारत का नाम न सिर्फ ऊंचा किया है बल्कि दुश्मन देश पाकिस्तान को अपना कर्जदार बना लिया है।

यह कहानी है भारतीय छात्र अंकित और पाकिस्तानी छात्रा मारिया की। दोनों यूक्रेन और रुस के बीच चल रही सैन्य जंग में फंस गए थे। इस दौरान अंकित और तमाम विदेशी छात्रों ने बंकरों में अपनी जान बचाने के लिए पनाह ली थी। जैसे-जैसे समय बीत रहा था हालात बिगड़ रहे थे। ऐसे में इन छात्रों ने वहां से निकलना बेहतर समझा।

बंकर में हुई मुलाकात

जिस वक्त अंकित बंकर में छुपा हुआ था, उस दौरान उस बंकर में पाकिस्तान के भी कई छात्र छुपे हुए थे। इन्हीं में से एक थीं मारिया। दोनों की मुलाकात पहली बार इसी बंकर में हुई थी। अंकित जब बंकर से दूसरी जगह जाने के लिए निकलने लगा तो मारिया ने उससे गुजारिश की उसे भी साथ ले चले।

इसपर पहले तो अंकित ने मना किया लेकिन फिर उसके हिंदुस्तानी दिल ने उसे ऐसा करने के लिए इजाजत नहीं दी। उसने पहले तो मारिया के घरवालों से फोन पर बात की, उन्हें भरोसा दिलाया कि वे उनकी बेटी को सुरक्षित पाकिस्तानी दूतावास तक पहुंचा देंगे।

रास्ते भर मारिया को अंकित ने दी हिम्मत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को दोनों साथ में कीव के बुगजाला रेलवे स्टेशन के लिए चल दिए। इस दौरान पांच किमी तक उन्होंने पैदल सफर तय किया। जब वे स्टेशन पहुंचे तो ट्रेन काफी भरी हुई थी। जैसे-तैसे अंकित ने पहले मारिया को ट्रेन में चढ़ाया उसके बाद खुद चढ़ गया। इस दौरान कुछ दूर चलने पर रेलवे ट्रैक पर जोर का धमाका हुआ जिसकी आवाज सुनकर मारिया काफी घबरा गई। हालांकि, अंकित ने उसे ढांढस बंधाया और उसे सही सलामत घर पहुंचाने का वादा किया।

इसके बाद 1 मार्च को दोनों टर्नोपिल स्टेशन पहुंच गए। यहां पहुंचकर मारिया और अंकित ने चैन की सांस ली। यही वो स्थान था जहां मारिया आसानी से पाकिस्तानी दूतावास से संपर्क कर सकती थीं।

पाक दूतावास ने की अंकित की तारीफ

गौरतलब है, पाकिस्तान दूतावास से संपर्क करने के बाद मारिया ने अंकित को धन्यवाद दिया और अधिकारियों को पूरी कहानी बताई। इसके बाद अधिकारियों ने दोनों को बस की मदद से रोमानिया बॉर्डर भेजा। बता दें, पाक दूतावास की तरफ से अंकित की तारीफ में कहा गया है कि एक भारतीय बच्चा हमारी बेटी को सुरक्षित ले आया। उसका शुक्रिया अब वो हमारा बेटा बन गया।

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