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बेटियों की शादी के लिए पिता ने बेंच दिया घर, अब बस स्टॉप पर काट रहा बुढ़ापा

इस संसार में जिन लोगों के सिर पर पिता का साया होता है उन्हें सबसे सुखी और भाग्यवान माना जाता है। कहते हैं पिता के होते हुए बाज़ार के सारे खिलौने अपने हैं… इस वाक्य का अर्थ है कि यदि बच्चा अपने पिता से मांग करता है कि पापा मुझे ये सारे खिलौने चाहिए तो उसके पिता उसे दिला देते हैं फिर वे एक बार नहीं सोंचते कि उसके पास पैसे हैं कि नहीं।

इस बात से तो आप वाकिफ ही हैं पिता भले ही कभी अपने बच्चों से रुख ना मिलाते हों लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि पिता अपने बच्चों से प्यार नहीं करते।

बच्चे की तकलीफ पर पिता का भी दुखता है दिल

this Father has sold the house for the marriage of daughters

वे प्यार करते हैं मगर जताते नहीं। बच्चे को तकलीफ में देखकर उस पिता को भी उतना दर्द होता है जितना कि बच्चे की मां को। फर्क बस इतना है कि मां उस दर्द को बयां कर देती है लेकिन पिता उस दर्द को छुपा जाते हैं जिससे कि उसके बच्चे को हिम्मत मिलती रहे। आज हम आपको ऐसे ही एक पिता के विषय में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी बेटियों के लिए अपना घर तक बेंच दिया और खुद आज बस स्टॉप पर जीवन जार रहे हैं।

सड़क पर आ चुके हैं मदासामी

बता दें, इनका नाम मदासामी है। ये तमिलनाडु के तेनकासी जिले की अलनकुलम तालुका के अनैयप्पापुरम गांव के निवासी हैं। किसी ज़माने में ये अपने क्षेत्र के मशहूर लोकगीत हुआ करते थे लेकिन आज ये पूरी तरह से सड़क पर आ चुके हैं। इनके पास ना रहने को मकान है ना खाने को रोटी। ये लोगों से भीख मांगकर गुज़ारा करते हैं। इनके पास इस वक्त कुछ कपड़े, चप्पल और पानी की बोतलों के सिवाए कुछ नहीं बचा है।

बेटियों की शादी के लिए लिया था कर्ज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मदासामी ने अपनी बेटियों की शादी के लिए कुछ कर्ज लिया था। उस वक्त उनका काम अच्छा चल रहा था। लेकिन कोरोना की वजह से उनका काम सब खराब हो गया। उनको लोगों ने पूछना बंद कर दिया। धीरे-धीरे उनके उपर कर्ज इतना बढ़ गया कि उन्हें अपना घर कौड़ियों के दाम में बेंचना पड़ा।

बताया जा रहा है कि इस बीच उनकी पत्नी की भी किसी गंभीर बीमारी से जूझने के कारण मौत हो गई। अब उनके परिवार में वे सिर्फ अकेले हैं। उनके पास घर तक नहीं है। इसलिए वे गांव में बने बस स्टेशन पर रहकर अपना गुज़ारा करते हैं।जानकारी के मुताबिक, अब तक उनकी बेटियों ने भी पिता की मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया है। वे राज्य के अलग-अलग जिलों में सुखमयी जीवन व्यतीत कर रही हैं।

सरकारी लाभ से भी हैं वंचित

एक समाचार चैनल से बातचीत करते हुए मदासामी ने बताया कि घर ना होने की वजह से उन्हें ना ही वृद्धापेंशन मिल पाती है और ना ही राशन मिल पाता है। हालांकि, उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड सब है।

गौरतलब है, अपनी इस समस्या के निवारण के लिए 61 वर्षीय मदासामी ने स्थानीय अधिकारियों से मुलाकात की है। उन्होंने अपनी समस्या का वर्णन किया है। जिसपर अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही उनकी परेशानी का हल निकालकर सरकारी लाभ उन्हें मुहैया करवाएंगे।

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