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इश शहर में आज तक नहीं हुई किसी मूर्ति की स्थापना, जानिये रहस्य

आज हम जिस भी गली, नुक्कड़, चौक-चौराहे से गुज़रते थे वहां किसी न किसी नेता, स्वतंत्रता सेनानी या किसी समाजसेवी की मूर्ति लगी मिल जाती है। इन मूर्तियों के माध्यम से उस इलाके के लोग संबंधित व्यक्ति के योगदान को नमन करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

मामूली विवाद दंगे का रुप ले लेता है

कई बार ये मूर्तियां विवाद का कारण भी बनती हैं। उदाहरण के तौर पर, एक समुदाय अपने नेता की मूर्ति लगाना चाहता है लेकिन दूसरा समुदाय उस नेता को पसंद नहीं करता है। ऐसी स्थिति में विवाद उत्पन्न हो सकता है। कई बार ये विवाद दंगे का रुप भी ले लेता है और सारा शहर मामूली सी बात के लिए एक-दूसरे के खून का प्यासा हो जाता है। आज हम आपको एक ऐसे शहर के विषय में बताने जा रहे हैं जहां आज तक एक भी मूर्ति स्थापित नहीं की गई है।

इस शहर में नहीं है कोई मूर्ति

there is no statue of a great leader in ambajogai city of maharashtra

सुनकर बड़ा अटपटा लग रहा है परंतु यह सत्य है। महाराष्ट्र के अंबाजोगाई में आज तक किसी भी चौक-चौराहे, गली-मोहल्ले, नुक्कड़ आदि पर पर कोई प्रतिमा नहीं स्थापित की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेढ़ लाख की आबादी वाले इस शहर के विषय में सुनने वाला हर शख्स चौंक जाता है। इस शहर के सड़क, चौराहों पर आज तक किसी भी नेता, व्यक्ति, समाज सेवी की प्रतिमा स्थापित नहीं की गई है।

नेता गुणों को अपनाते हैं लोग

वहीं, यहां के स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर के लोगों के अलावा यहां के किसी नेता ने भी इस बात पर जोर नहीं दिया कि यहां कोई मूर्ति स्थापित की जाए। उन्होंने आगे कहा कि यही कारण है कि हमारा शहर सामाजिक सद्भाव के लिए पहचाना जाता है। यहां के लोग नेताओं की मूर्ति लगाने की बजाए उसके गुणों को अपनाने में विश्वास रखते हैं।

शिक्षा का केंद्र था यह शहर

गौरतलब है, वरिष्ठ साहित्यकार प्रो (डॉ) मुकुंद राजपंखे ने इस शहर के विषय में एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान कहा था कि, इस शहर में कोई मूर्ति या प्रतिमा नहीं है, बल्कि खाली चौक हैं। इस शहर को शिक्षा का केंद्र माना जाता है। निजाम के समय से यहां कोई मूर्ति स्थापित नहीं हुआ और इसी के चलते यहां दो समुदायों में कभी भी तकरार नहीं हुई।

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