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महिलाओं के लिए मिसाल बनकर उभरने वाली तेलंगाना की इकलौती महिला मैकेनिक को जानते हैं आप?

आजादी के 75 सालों बाद भी महिलाओं की स्थिति में ज्यादा परिवर्तन नहीं आया है। आज भी लोग उन्हें कमज़ोर और कोमल समझते हैं। हालांकि, लोगों की इसी सोंच को बदलने के लिए तमाम महिलाओं ने कदम उठाना शुरु कर दिया है। वे अपने कारनामों से पुरुषों को पीछे छोड़ रही हैं। आज हम आपको एक ऐसी महिला के विषय में बताने जा रहे हैं जिसने अपने पति की मदद के लिए मैकेनिक बनना उचित समझा।

बच्चे के जन्म के दौरान पति नहीं लौटा घर

इस महिला का नाम येडालपल्ली आदिलक्ष्मी। तेलंगाना के कोठागुडेम के सुजाता नगर में रहने वाली आदिलक्ष्मी का विवाह साल 2010 में वीरभद्रम के साथ हुआ था। दोनों काम की तलाश में इस शहर में आ गए थे। यहां आकर उसके पति ने एक पंचर की दुकान खोल ली और छोटी से लेकर बड़ी गाड़ियों तक सबके पंचर जोड़ना शुरु कर दिया। हालांकि, वह कई-कई दिनों तक घर नहीं आ पाता था। इस बात से आदिलक्ष्मी काफी परेशान थी। एक बार तो ऐसा समय आया कि उसकी पत्नी दूसरे बच्चे को जन्म दे रही थी और वीरभद्रम गाड़ियों की सर्विसिंग कर रहा था।

तेलंगाना की इकलौती महिला मैकेनिक
रोजी-रोटी का यह लालच उसकी पत्नी को कतई भा नहीं रहा था। इसलिए उसने फैसला किया कि वह भी अब अपने पति का हाथ बटाएगी। पहले तो वीरभद्रम ने उसका विरोध किया लेकिन बाद में वह मान गए। धीरे-धीरे आदिलक्ष्मी मैकेनिक बनने के सारे गुण सीखती चलीं गईं। आज की तारीख में वे तेलंगाना की इकलौती महिला मैकेनिक हैं।

कुशल मैकेनिक बनीं आदिलक्ष्मी

अपने निजी जीवन के विषय में बात करते हुए आदिलक्ष्मी ने एक बार बताया था कि, वे अपने पिता की दूसरी नंबर की बेटी हैं। उन्होंने महज़ चौथी कक्षा तक ही पढ़ाई की है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी इसलिए शुरुआत से ही छोटा-मोटा काम करके गुजारा किया। 2010 में शादी के बाद वीरभद्रम के साथ काम की तलाश में सुजाता नगर आ गई। उन्होंने बताया कि यहां आकर उनके पति ने मैकेनिक की दुकान खोल ली। इस दुकान में कुछ समय बदा उन्होंने ने भी काम करना शुरु कर दिया। अब वे छोटी गाड़ियों से लेकर ट्रक तक के भारी-भरकम पहियों के पंचर जोड़ लेती हैं।

सीएम की बेटी ने किया सम्मानित

समय के साथ उनकी तरक्की होने लगी जिसका नतीजा ये रहा कि उन्होंने रिपेयर शॉप के साथ-साथ वेल्डिंग की दुकान भी खोल ली। धीरे-धीरे तेलंगाना की एकमात्र महिला मैकेनिक का नाम पूरे इलाके में प्रसिद्ध हो गया। इसके बाद आदिलक्ष्मी के काम से प्रभावित होकर तेलंगाना राष्ट्र समिति की नेता और मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव की बेटी कविता ने उन्हें हैदराबाद में सम्मानित किया था। इस दौरान उन्हें टायर बदलने की मशीन भेंट की गई थी। इसके अलावा एक अन्य संस्था से जुड़े कपल ने उन्हें कुछ ऐसी मशीनें भेंट की थी।

बेटियों को बनाएंगी पुलिस अधिकारी

अब आदिलक्ष्मी का जीवन आसानी से कट रहा है। वे अपने हाथ-पैरों के दमपर घर खर्च में पति का हाथ बंटा रही हैं। उनकी दो बेटिंयां हैं जिन्हें वे अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए भेजती हैं। उनका मानना है कि उन्होंने बचपन में गरीबी के कारण बहुत कुछ सहा है, जिस वजह से वह स्कूल भी नहीं जा पाईं। हालांकि, अब वे अपनी बेटियों को पढ़ाकर पुलिस अधिकारी बनाना चाहती हैं।

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