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बचपन में की किसानी, बड़ा होकर बना पुलिसवाला, अब बन गया प्रोफेसर, जानिये कैसे

कहते हैं इंसान को सपने जरुर देखने चाहिए। अगर वह सपने नहीं देखेगा तो बड़ा आदमी बनेगा कैसे। आज हम आपको एक ऐसे ही व्यक्ति के विषय में बताने जा रहे हैं जिसने अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की, जिसका नतीजा यह रहा कि वह सफल हो गया।

इस व्यक्ति का नाम अरविंद पेरुमल है। इनका जन्म तमिल नाडु के एक छोटे से गांव में हुआ था। इनके पिता पेशे से किसान थे। वे जैसे-तैसे करके अपना घर-बार चलाते थे। छोटी उम्र से ही अरविंद को पढ़ने का शौक था। वे बड़े होकर प्रोफेसर बनना चाहते थे। उनका सपना था कि वे अपने आस-पास रहने वाले उन बच्चों के लिए कुछ करना चाहते थे जो अपनी आर्थिक तंगी के चलते पढ़ नहीं सकते थे।

बचपन में करते थे खेती

हालांकि, वे खुद ही उस वक्त आर्थिक दिक्कतों का शिकार थे। इसलिए वे अपने पिता के साथ खेतों पर उनकी मदद करते थे। जैसे-तैसे उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा पास की। इसमें वे काफी अच्छे अंकों से पास हुए थे। इसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट में जिला स्तर पर टॉप किया तो उनका आत्मविश्वास और बढ़ गया।

घर की जिम्मेदारियों के आगे छोड़ी पीएचडी

12वीं के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन किया और उसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन। इसके बाद वे पीएचडी करने का प्लान बना रहे थे कि उनपर जिम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके पिता की तबीयत खराब हो गई जिसकी वजह से घर की आमदनी पूरी तरह से रुक गई। ऐसे में घर का बड़ा बेटा होने के नाते उनपर घर चलाने की जिम्मेदारी आ गई। इसके बाद अरविंद ने अपना पीएचडी का प्लान कुछ सालों के लिए टाल दिया। उन्होंने तमिल नाडु पुलिस सर्विस कमीशन की परीक्षा पास की और बन गए कॉन्सटेबल। 11 सालों तक अरविंद ने बतौर पुलिस कॉन्सटेबल देश की सेवा की। इसके बाद अब उन्होंने इस पोस्ट से इस्तीफा दे दिया है।

पीएचडी के लिया एडमिशन

दरअसल, कॉन्सटेबल की नौकरी के दौरान उन्होंने आजीविका का तो माध्यम ढूंढ लिया था लेकिन अपने सपनों को पूरा करने का कोई माध्यम नहीं ढूंढ पाए थे। इसलिए उन्होंने फैसला किया कि वे अपनी नौकरी के दौरान पीएचडी कंप्लीट करेंगे। इसके लिए उन्होंने मनोनमनियम सुंदरानर यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। यहां उन्होंने ‘Economic Study on Wage Level in The Informal Sector’ विषय पर रिसर्च शुरु की और साल 2019 में अपनी पीएचडी खत्म की। 2021 में उन्हें डॉक्टरेट की डिग्री भी मिल गई।

अरविंद बन गए अध्यापक

गौरतलब है, अरविंद ने 11 साल तक पुलिस की नौकरी करने के बाद अब इस्तीफा दे दिया है। अब वे बतौर प्रोफेसर एसटी हिंदू कॉलेज में नियुक्त हुए हैं। यहां वे बच्चों को पढ़ाते हैं और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करते हैं।

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