Breaking News

55 वर्षीय व्यक्ति के पेट से सफलतापूर्वक निकाला गया कांच का ग्लास, बिहार के डॉक्टरों ने जीता लोगों का दिल

दुनिया में चिकित्सकों को खुदा का दर्जा दिया जाता है। भगवान के बाद इंसान डॉक्टरों से ही उम्मीद लगाता है कि वे उसकी जान बचा सकते हैं और ये चिकित्सक भी मरीजों के विश्वास पर खरे उतरते हैं। यही कारण है समाज में डॉक्टर्स का हर कोई सम्मान करता है।

कोरोना में की रक्षा

इसका प्रबल उदाहरण कोरोना काल में आप सबके सामने आ चुका है। इस भयंकर महामारी के दौरान भी डॉक्टरों ने अपने काम से छुट्टी नहीं ली और मरीजों की सेवा में तत्पर रहे। उन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों की रक्षा की जिसका नतीजा ये रहा कि भारत कोरोना जैसी विनाशकारी बीमारी से जूझने में कामयाब रहा।

अब एक बार फिर डॉक्टरों ने अपने पेशे के साथ न्याय करके दिखाया है। दरअसल, बिहार के मुजफ्फरपुर में तैनात चिकित्सकों ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसपर किसी को विश्वास नहीं हो रहा है।

पेट में दर्द और कब्ज की शिकायत

मालूम हो, पिछले दिनों मुजफ्फरपुर के माडी स्थित निजी अस्पताल में एक 55 वर्षीय व्यक्ति पेट में दर्द और कब्ज़ की शिकायत लेकर पहुंचा था। यहां पहुंचकर उसने डॉक्टरों को बताया कि पिछले कुछ दिनों से उसे फ्रैश होने में दिक्कत हो रही है। इसके अलावा उसका पेट भी काफी दर्द हो रहा है।

इस पर चिकित्सकों ने उसके पेट का अल्ट्रासाउंड किया। उन्होंने पाया कि मरीज की आंतों में सूजन है जिसकी वजह से उनका ऑपरेशन करना पड़ेगा।

पेट में कांच का ग्लास

मरीज के परिजनों की सहमति के बाद डॉक्टर्स ने उस मरीज का ऑपरेशन स्टार्ट किया तो उन्होंने जो देखा वो देखकर वे दंग रह गए। दरअसल, मरीज की आंतों के बीच में उन्होंने एक कांच का ग्लास फंसा पाया। कई घंटों की सर्जरी के बाद चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक उस ग्लास को निकाल लिया।

इस अजीबो-गरीब केस के विषय में बात करते हुए डॉ. महमुदुल हसन ने बताया कि ‘कांच का गिलास मरीज के पेट के अंदर कैसे पहुंचा, यह शोध का विषय है’। उन्होंने कहा कि, ‘जब हमने मरीज से इस बारे में पूछा तो उसने जवाब दिया कि चाय पीते समय वो गिलास निगल गया था। हालांकि, यह समझ से परे है क्योंकि इंसान की भोजन नली बहुत संकरी होती है। ऐसे में कोई गिलास को कैसे निगल सकता है’।

सफलतापूर्वक निकाला गया ग्लास

डॉ. महमुदुल हसन ने आगे बताया कि ‘शुरू में एंडोस्कोपिक के जरिये गिलास को निकालने की कोशिश की गई थी, लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली और अंतत: ऑपरेशन करना ही पड़ा। मरीज की हालत फिलहाल ठीक है’।

About Editorial Team

Check Also

1800 करोंड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ यदाद्रि मंदिर, दरवाजों पर लगा है 125 किलो से अधिक सोना

साउथ इंडिया के मंदिरों की बात ही निराली होती है। यहां के लोगों में ईश्वर …

Leave a Reply

Your email address will not be published.