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छोटी सी दुकान से शुरु किया था आइसक्रीम का बिजनेस, आज है 300 करोंड़ का मालिक

सफलता एक दिन में किसी की झोली में नहीं गिरती है। इसके पीछे कई दिनों की मेहनत और रातों की नींद लगती है। कई बार लोग सोंचते हैं कि हम भी ये बिजनेस कर लें तो सफल हो जाएंगे, लेकिन जब उनपर आर्थिक तंगी पड़ती है तो वे परिस्थितियों के आगे झुक जाते हैं और काम धंधा छोड़कर फिर वापस अपनी घिसी पिटी जिंदगी की ओर रवाना हो जाते हैं।

आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति की संघर्षगाथा सुनाने जा रहे हैं जिसने एक छोटे से ढाबे से शुरुआत करके 300 करोंड़ तक का सफर तय किया। हम बात कर रहे हैं रघुनंदन कामत की। जी हां, वही कामत जिनकी कंपनी की आइसक्रीम आप बड़े चाव से खाते हैं। नाम से तो आप समझ ही गए होंगे कि हम किस कंपनी की बात कर रहे हैं। जी हां, मशहूर आइसक्रीम कंपनी नैचुरल्स की। जिसकी पहचान उसकी शुद्धता और स्वाद के दमपर बनी है।

लेकिन ये बिजनेस एक दिन में खड़ा नहीं हुआ है। इसके पीछे कामत की वर्षों पुरानी मेहनत लगी है। बता दें, रघुनंदन कामत का जन्म कर्नाटक के पुत्तुर तालुका के मुलकी गांव में हुआ था। उनके पिता पेशे से फल विक्रेता थे। परिवार बड़ा था इसलिए कामत के 6 भाई कुछ ना कुछ कमा के घर खर्च में हाथ बंटाते थे। धीरे-धीरे कामत भी बड़े होते गए और उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारियों को समझा और फैसला किया कि वे भी पिता का हाथ बटाएंगे। इसके लिए उन्होंने पिता के फलों के काम में हाथ बंटाना शुरु कर दिया। कुछ ही दिनों में उन्हें फलों के स्वाद और उनकी शुद्धता की सटीक पहचान हो गई। इसके बाद 1966 में वे मुंबई आ गए। यहां उनके भाई गोकुल नाम से एक ढाबा चलाते थे। जहां कामत भी आकर काम करने लगे।

यहां कामत ने देखा कि उनके भाईयों के होटल पर एक अलग तरह की आइसक्रीम मिलती थी, जो लोगों को काफी पसंद आती थी। यहीं से कामत को अपना बिजनेस करने का आइडिया मिल गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कामत ने 1984 में नेचुरल्स आइसक्रीम मुंबई नाम से जूहू बीच पर एक दुकान खोली। यहां वे नेचुरल आइसक्रीम बनाया करते थे। उनकी आइसक्रीम की खासियत थी कि वे फल, चीनी और दूध से ही आइसक्रीम तैयार किया करते थे। उनका मानना था कि अगर मार्केट में अपनी पहचान स्थापित करनी है तो क्वालिटी के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करना होगा।

हालांकि, उनकी इस दुकान पर ज्यादा लोग नहीं आते थे। ग्राहकों को अपनी आइसक्रीम की तरफ आकर्षित करने के लिए उन्होंने एक तरकीब निकाली। उन्होंने आइसक्रीम के साथ-साथ पाव भाजी का भी काम शुरु कर दिया। उनका उद्देश्य था कि जब लोगों को पाव भाजी खाएंगे तो उन्हें मिर्च लगेगी जिसकी वजह से उन्हें आइसक्रीम लेनी पड़ेगी। ऐसे उनकी आइसक्रीम की सेल भी बढ़ेगी।

कामत का यह आइडिया काम कर गया। देखते ही देखते लोगों की जुबान पर उनकी आइसक्रीम का टेस्ट चढ़ गया। 1985 में कामत ने पाव भाजी का काम बंद कर दिया और सिर्फ आइसक्रीम पर ही फोकस किया। इसके लिए उन्होंने ग्राहकों की मदद ली। वे उनसे पूछते कि मार्केट में अन्य कौन-कौन से फ्लेवर्स पंसद किये जाते हैं जिसपर उन्हें सही राय मिलती।

इस सलाह मशवरा के बाद कामत ने डिसाइड किया कि वे अब अपने आइसक्रीम के फ्लेवर्स बढ़ाएंगे। बता दें, कामत अब तक पांच फ्लेवर्स की ही आइसक्रीम बनाकर बेंच रहे थे। इनमें आम, चॉकलेट, सीताफल, काजूद्राक्ष और स्ट्रॉबेरी शामिल थे। अब उन्होंने अपना बिजनेस बढ़ा दिया और अपनी आइसक्रीम के फ्लेवर्स में कटहल, कच्चा नारियल और काला जामुन भी जोड़ दिया। इनको बनाने के लिए कामत ने ऑर्डर देकर एक मशीन भी बनवाई। इस मशीन से ही कामत आइसक्रीम तैयार किया करते थे।

कुछ ही सालों में पूरे मुंबई में कामत की आइसक्रीम प्रसिद्ध हो गई। देखते ही देखते उनकी छोटी सी दुकान एक कंपनी में तब्दील हो गई। आज नेचुरल्स आइसक्रीम कंपनी के पूरे देश में 135 आउटलेट हैं। इनमें 20 से अधिक फ्लेवर्स की आइसक्रीम मिलती है। मौजूदा समय में कामत की इस कंपनी की मार्केट वैल्यू 300 करोंड रुपये है।

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