Breaking News

परिजनों की मौत से भी नहीं टूटा हौंसला, पहले बनी IPS फिर बनी IAS, जानिये नम्रता जैन की कहानी

कहते हैं परिस्थितियां कोई भी हों इंसान को अपनी मेहनत से पीछे नहीं हटना चाहिए। उसकी कोशिशों का फल उसे एक दिन ज़रुर मिलता है। इसका प्रबल उदाहरण हैं नम्रता जैन। जी हां, नम्रता इस वक्त आईएएस अधिकारी हैं और सच्चे मन से देश की सेवा कर रही हैं।

हालांकि, उनका यह सफर काफी कठिनाइयों भरा रहा। पहले उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा, इसके बाद परिजनों का और फिर उनपर उनके करीबियों की मौत का दुख पहाड़ बनकर टूटा। इस सबके बावजूद नम्रता ने कभी हार नहीं मानी और उन्होंने अपने सपने को पूरा करके इतिहास रच दिया।

नक्सलियों के गढ़ में जन्मीं नम्रता

बता दें, नम्रता जैन का जन्म छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा में हुआ था। नक्सलियों से प्रभावित इस इलाके में आए दिन कोई न कोई ऐसी घटना हो जाती थी जिसकी वजह से ज्यादातर समय स्कूल और कॉलेज बंद ही रहते थे।

मां ने दिया साथ

जैसे-तैसे नम्रता ने अपनी 10वीं तक की शिक्षा कारली के निर्मल निकेतन स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्हें आगे की शिक्षा के लिए दंतेवाड़ा से बाहर जाना था। लेकिन उनके पिता और परिवार के अन्य सदस्य इसके लिए तैयार नहीं थे। हालांकि, इस दौरान नम्रता का साथ उनकी मां ने दिया। उन्होंने परिवार वालों को समझाया जिसके बाद सभी मान गए।

दिल्ली जाकर की UPSC की तैयारी

इसके बाद नम्रता शहर से बाहर चली गईं और उनका ज्यादातर समय दंतेवाड़ा से बाहर ही गुज़रा। उन्होंने अच्छे नंबरों से 12वीं पास करके भिलाई स्थित भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकॉम इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद एक अच्छी कंपनी में उनकी नौकरी लग गई। हालांकि, उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी और दिल्ली जाकर यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला लिया।

2016 में बनीं IPS

साल 2015 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी जिसमें वे सफल नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कड़ी मेहनत की और अगली साल एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा दी। साल 2016 में वे ऑल इंडिया 99वीं रैंक लाकर आईपीएस अधिकारी बन गईं। इसके बाद उनकी ट्रेनिंग हुई और फिर उन्हें मध्य प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी नियुक्त कर दिया गया।

हालांकि, इस सफलता के बावजूद नम्रता खुश नहीं थी। उनका सपना था कि वे आईएएस बनें। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने एक बार फिर यूपीएससी की तैयारी प्रारंभ की और नौकरी से 1 साल की छुट्टी ली।

2019 में बनीं IAS

इस दौरान उन्होंने खबर प्राप्त हुई कि उनके बड़े चाचा की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई जिससे वे काफी दुखी हुईं। कुछ महीनों बाद उन्हें पता चला कि उनके छोटे चाचा की भी दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई है। घर में अचानक हुई इन मौतों से नम्रता पूरी तरह हिल गईं थीं। वे काफी दिन बीमार भी रहीं। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके। वे डटी रहीं। उन्होंने साल 2018 में यूपीएससी का एग्जाम दिया जिसमें वे ऑल इंडिया 12वीं रैंक लाकर आईएएस ऑफिसर बन गईं।

गौरतलब है, नम्रता की नियुक्ति छत्तीसगढ़ के महासमुंद में एसडीएम के पद पर हुई।

About Editorial Team

Check Also

1800 करोंड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ यदाद्रि मंदिर, दरवाजों पर लगा है 125 किलो से अधिक सोना

साउथ इंडिया के मंदिरों की बात ही निराली होती है। यहां के लोगों में ईश्वर …

Leave a Reply

Your email address will not be published.