Breaking News

छोटे से कमरे से हुई थी Dabur की शुरुआत, आज बन गया 1 लाख करोंड़ का ब्रांड

बचपन से लेकर जवानी तक जितने भी प्रोडक्ट्स हमने यूज़ किये हैं उनमें ज्यादातर चीजें डाबर की ही रही हैं। फिर चाहें वो सर्दियों में खाया जाने वाला डाबर च्यवनप्राश हो या फिर सुबह उठकर किया जाने वाला डाबर लाल मंजन। ऐसे ही तमाम प्रोडक्ट्स मार्केट में मौजूद हैं जिनको हमने बचपन से यूज़ किया है। लेकिन क्या आपको पता है कि इसकी शुरुआत कब, कहां और कैसे हुई थी?

बता दें, देश-दुनिया में अपने प्रोडक्ट्स के माध्यम से पहचान बना चुकी डाबर नाम की इस कंपनी की शुरुआत डॉ. एस के बर्मन ने की थी। 1984 में कलकत्ता के निवासी डॉ. एस के बर्मन ने मलेरिया और हैजा से जूझ रहे मरीजों की मदद के लिए शुद्ध आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स बनाना शुरु किया था। इन्हें वे घर पर ही बैठकर अपने हाथ से बनाते थे। कुछ ही सालों में उनके ये प्रोडक्ट्स इतने लोकप्रिय हुए कि 1986 में उन्होंने एक फैक्ट्री लगा दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. एसके बर्मन को लोग डॉक्टर साहब कहकर बुलाते थे। इसी से उन्हें डाबर का आइडिया आया था। उन्होंने डॉक्टर का डा लिया और बर्मन बर लिया और दोनों को मिलाकर बना दिया डाबर। इस बात से तो आप वाकिफ ही हैं कि डाबर की पहचान शुद्ध देशी प्रोडक्ट्स के लिए बनी हुई है। यही कारण हैं कि लोगों को डाबर पर भरोसा है।

बता दें, उन दिनों डॉ बर्मन द्वारा शुरु की गई डाबर कंपनी ठीक-ठाक चल रही थी कि तभी साल 1907 में उनका निधन हो गया। इसके बाद उनकी इस कंपनी को संभालने की जिम्मेदारी सीएल बर्मन के कंधों पर आ गई।

पिता की विरासत का सार्थक उपयोग करते हुए सीएल बर्मन ने दिनरात मेहनत करके डाबर को उन उचाइयों तक पहुंचाने में मदद की जिसके विषय में कोई सोंच भी नहीं सकता था। उन्होंने डाबर के लिए रिसर्च लैब से लेकर कंपनी के प्रोडक्ट्स के विस्तार पर भी काम किया। कुछ ही सालों में कंपनी का दबदबा पूरे भारत में हो गया था। इस दौरान 1994 में डाबर ने शेयर मार्केट में भी इन्वेस्ट किया। लोगों का भरोसा डाबर पर अब तक इतना बन चुका था कि लोगों ने डाबर के आईपीओ को 21 गुना ज्यादा सब्सक्राइब किया गया।

साल 1996 तक आते-आते डाबर के प्रोडक्ट्स इतने बढ़ गए कि उन्हें तीन हिस्सों में बांटना पड़ा। इनमें हेल्थकेयर, फैमिली प्रोडक्ट और आयुर्वेदिक प्रोडक्ट शामिल हैं।

गौरतलब है, वर्ष 2000 में डाबर का टर्नओवर 1 हजार करोड़ तक पहुंच गया था। इसके बाद कंपनी ना जाने कितनी ही और कंपनियों का अधिग्रहण किया। इनमें ओडोनिल से लेकर फेम केयर फार्मा तक सब शामिल हैं। इस सबका नतीजतन कंपनी के द्वारा तैयार किए जा रहे प्रोडक्ट्स की सेल इतनी बढ़ गई है कि अब बर्मन परिवार की नेट वर्थ 11.8 बिलियन डॉलर हो गई है।

About Editorial Team

Check Also

1800 करोंड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ यदाद्रि मंदिर, दरवाजों पर लगा है 125 किलो से अधिक सोना

साउथ इंडिया के मंदिरों की बात ही निराली होती है। यहां के लोगों में ईश्वर …

Leave a Reply

Your email address will not be published.