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राजा से तोहफे में मिले चंदन के बाग को मजदूर ने बनाया कोयले की खदान, जानिये कैसे किया यह कारनामा

कई बार हमारी जिंदगी में ऐसी स्थिति आती है जहां हम आपको दो रास्तों के बीच खड़ा हुआ पाते हैं। इनमें एक रास्ता कठिनाइयों भरा होता है तो दूसरा सरल, शांत और बिना दिक्कतों का। इस परिस्थिति में हमें सही रास्ते का चुनाव करना होता है, कई बार हमारा फैसला हमें ऊंचाइयों पर ले जाता है तो कई बार हम सफल नहीं हो पाते हैं। जिसकी वजह से हमें बाद में पछताना पड़ता है।

इसलिए आमतौर पर जो लोग सही समय पर साधनों का उपयोग करके समय के साथ अपने जीवन में परिवर्तन कर लेते हैं वे सफल हो जाते हैं बाद बाकी आम नागरिक बनकर संघर्ष भरी जिंदगी व्यतीत करते हैं। आज हम आपको एक कहानी के माध्यम से साधनों के सही उपयोग की महत्वता के विषय में बताने जा रहे हैं।

चंदन के बाग

एक बार एक नगर में एक राजा था। उसे चंदन के पेड़ों का बाग लगाने का काफी शौक था। इसलिए उसने अपने नगर में चारों तरफ चंदन के बाग लगवाए थे। इन बागों से निकलने वाली लकड़ी से वह तेल और इत्र तैयार करके मोटा पैसा कमाता था।

एक दिन राजा अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए अपने नगर में निकला। लौटते-लौटते शाम हो गई तो राजा ने जंगल में एक भील की कुटिया देखी। उसने फैसला किया कि आज रातभर यहीं विश्राम करने के बाद अपने महल की ओर प्रस्थान किया जाएगा।

भील के घर पहुंचा राजा

राजा के दूतों द्वारा भील को सूचना दी गई जिसपर वह काफी प्रसन्न हुआ। उस गरीब भील ने राजा का पूरे जोरों-शोरों से स्वागत किया। उनके लिए बढ़िया बिस्तर बिछाए, अच्छा भोजन बनवाया। इसके अलावा रातभर राजा की सेवा की। भील के इस कृत्य से राजा काफी खुश हुए। उन्होंने भील से पूछा कि तुम किस तरह से जोवनोपार्जन करते हो? इसपर भील ने कहा कि वह जंगल से लकड़ियां काटकर उन्हें कोयला बना लेता है इसके बाद उसे बेचकर जो पैसा मिलता है उससे वह अपना और अपने बच्चों का लालन-पालन करता है।

भील की सेवा से प्रसन्न राजा ने उसे अपना एक चंदन का बाग तोहफे में दे दिया। राजा ने उससे कहा कि अब तुम इस बाग की देखरेख करो और इससे होने वाली कमाई से अपना गुज़ारा करो। राजा की इस भेंट को भील ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। कुछ समय बाद राजा को अपने चंदन के बाग देखने का मन हुआ तो वह उस स्थान पर पहुंच गया।

कोयला देखकर राजा ने खोया आपा

यहां पहुंचने के बाद उसके होश उड़ गए। उसने देखा कि चंदन की लकड़ी पूरी तरह से कोयले में बदल चुकी थी। भील की इस हरकत से राजा आगबबूला हो गया। उसने भील को बहुत बातें कहीं। इसके बाद राजा ने भील से कहा कि इन लकड़ियों को कोयले में तब्दील करने के बजाए इन्हें साबुत तरीके से बाज़ार में बेंचकर आए। भील ने राजा के आदेश के अनुसार बाजार में जाकर लकड़ी बेंच दी जिससे उसे पहले के मुकाबले काफी ज्यादा मुनाफा हुआ।

अब भील को समझ आ गया था कि जिस लकड़ी को वह इतने दिनों से कोयला समझकर बेच रहा था असल में वह लकड़ी चंदन की थी जिसकी बाजार में कीमत अधिक होती है।

साधनों का सही तरह से करें उपयोग

गौरतलब है, इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें जो साधन मिले हैं उनका सही समय पर सही जगह उपयोग करना चाहिए वरना हम अपने नुकसान के सिवा कुछ नहीं कर पाएंगे।

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