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इस गांव के हर घर का एक बुजुर्ग है पुरोहति और युवा हैं सेना में तैनात, जानिये कहां है ये अनोखा गांव

आपने अक्सर ऐसे गांवों के विषय़ में सुना होगा जिनको लेकर कहा जाता है कि इस गांव के हर घर से एक शख्स IAS या फिर IPS ऑफिसर है। लेकिन आज हम जिस गांव के विषय में बताने जा रहे हैं उस गांव ने ऐसा कीर्तिमान रच दिया है जिसके विषय में सुनकर आप निश्चित ही चौंक जाएंगे।

इस बात से तो आप सब वाकिफ ही हैं कि देश का हर युवा भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का सपना देखता है। हां वो बात अलग है कि कई बार कुछ युवा अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उतनी निष्ठा से तैयारी नहीं करते हैं जिसकी वजह से उनका सपना अधूरा ही रह जाता है। लेकिन कुछ युवा ऐसे भी होते हैं जो अपनी लगन से हर किसी को हैरान कर देते हैं। वे अपनी लगन और मेहनत के दमपर भारतीय सेना में भर्ती होते हैं और जरुरत पड़ने पर अपने प्राणों की भी आहूति दे देते हैं।

झारखंड का गिद्धी गांव

ऐसा ही एक गांव है जिसमें हर घर से एक शख्स भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहा है। यह अनोखा गांव झारखंड में स्थित है। इस गांव का नाम गिद्धी है। यहां के ज्यादातर युवा सेना की नौकरी कर रहे हैं। इस गांव के नाम बस यही एक कीर्तिमान नहीं है। बल्कि गिद्धी में रहने वाले ज्यादातर बुजुर्ग पुरोहित हैं और मंगल कार्य कराते हैं। इसका अर्थ ये है कि गिद्धी गांव के सभी घरों के बुजुर्ग पुरोहित या पंडित हैं जबकि वहां के युवा सेना में कार्यरत हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, झारखंड जिले के रमना प्रखंड स्थित गिद्धी गांव के हर घर के बुजुर्ग पुरोहित बनकर मंगल कार्य संपन्न कराते हैं जबकि उनके सेना व अर्द्धसैनिक बलों में तैनात होकर देश की सेवा कर रहे हैं। इस अनोखे गांव की आबादी कुल 350 है। यहां के 70 प्रतिशत युवा सेना में भर्ती हो चुके हैं।

सुबह उठकर युवा करते हैं सेना में जाने की तैयारी

बताया जाता है कि गिद्धी गांव का हर युवा सुबह उठकर सबसे पहले भारत माता की जय बोलता है, बाद में गांव के मैदान में दौड़ लगाते हैं। गांव के अन्य युवाओं को देखकर गांव के बाकी के युवाओं के भीतर भी सेना में भर्ती होने के लिए काफी जुनून भरा होता है। वे मैदान में घंटों पसीना बहाकर अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करते हैं।

साल 1979 में हुई पहली भर्ती

जानकारी के अनुसार, इस गांव से सबसे पहले उदय कुमार पांडेय और सुरेंद्र कुमार पांडेय साल 1979 में भर्ती हुए थे। बाद में उदय सेनानायक बनकर रिटायर हुए जबकि सुरेंद्र ने हवलदार के पद से सेवानिवृत्ति ली। इन दोनों युवाओं को देखरर गांव के अन्य युवाओं में ऐसा जुनून जगा कि गांव का हर युवा सेना में भर्ती के लिए तैयारी में जुट गया। इसमें उनके माता-पिता ने भी खूब सहयोग किया। जिसका नतीजा ये रहा कि आज की तारीख में गिद्धी गांव के ज्यादातर युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं।

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