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बधुंआ मजदूरी और जिस्मफरोशी के दलदल से मासूमों को निकाल कर लाने वाले इस शख्स को जानते हैं आप?

बाबा भोलेनाथ की नगरी जितनी ही अपनी पवित्रता के लिए जानी जाती है उतनी ही जिस्मफरोशी और देह व्यापार के लिए भी। एक समय था जब बनारस में देह व्यापार चरम पर था। यहां मासूम बच्चियों को बदनाम गली के इन दलदलों में घुट-घुटकर मरने के लिए छोड़ दिया जाता था।

लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। बहुत हद तक अब इन चीजों पर काबू पा लिया गया है। इसमें सबसे बड़ा रोल अजीत सिंह नाम के इस शख्स का रहा है। इन्होंने बनारस में फैली गंदगी को साफ करने की जो कसम युवावस्था में खाई थी आज भी उसे निभा रहे हैं।

घरवालों ने किया विरोध

बताया जाता है कि अजीत जब 17 वर्ष के थे उस वक्त वे बनारस एक शादी में आए थे। इस दौरान उन्होंने एक लड़की को देखा और उन्हें लगा कि इसे पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहिए। अजीत ने उस लड़की के सामने प्रस्ताव रखा कि क्या वो पढ़ना चाहेगी? इसपर वह ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगी। हालांकि, उस बच्ची की मां को अजीत की यह बात भा गई। उसने सोंचा कि अगर उसकी बच्ची पढ़-लिख जाती है तो उसे उसकी तरह नाच-गाकर पैसा कमाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। बच्ची की मां ने उसे अजीत के संग भेज दिया। वे उसे अपने घर ले आए। घरपर लोगों ने उनका विरोध किया।

घरवालों को आश्चर्य हो रहा था कि 17 साल की उम्र में जो व्यक्ति खुद पढ़ रहा है वो कैसे किसी और को पढ़ा सकता है। इसपर अजीत ने उन्हें बच्ची की पूरी जिम्मेदारी उठाने का वादा किया। उन्होंने इसके लिए पार्ट टाइम जॉब करना शुरु कर दिया।

कुछ समय बाद अजय ने अन्य बच्चों को भी लाना शुरु कर दिया। वे बनारस की बदनाम गलियों का चक्कर लगाने लगे। वे वहां जब भी जाते एक बच्चे को तो अपने साथ लेकर ही लौटते। धीरे-धीरे उनका काफिला बढ़ता जा रहा था लेकिन शहर में जिस्मफरोशी का धंधा बेशुमार तरीके से बढ़ रहा था।

सामाजिक संस्था की हुई शुरुआत

ऐसे में अजीत ने अपने कुछ साथियों की मदद से साल 1993 में गुड़िया नामक एक सामाजिक संस्था की स्थापना की। इसके तहत उन्होंने समाज में फैली गंदगी को जड़ से खत्म करने का अभियान चालू किया।

सबसे पहले अजीत और उनकी संस्था के लोगों ने देह व्यापार में संलिप्त व्यापारियों पर नकेल कसना प्रारंभ किया। उनके चंगुल से उन्होंने कई बच्चियों को मुक्त कराया। इसके बाद उन्होंने शहर की तमाम उन फैक्ट्रियों आदि पर हमाल बोला जहां मासूम बच्चों से काम करवाया जाता था। धीरे-धीरे करके उनका नाम जिस्मफरोशी करने वाले अपराधियों तक पहुंचने लगा। कई बार अजीत को उनके इस नेक काम के लिए धमकियां भी मिलीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए चला रहे अभियान

गौरतलब है, अब अजीत की अपनी संस्था के माध्यम से उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में फैले दे व्यापार के गोरख धंधे को पूरी तरह नष्ट करने में जुटे हुए हैं।

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