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भारत के इस गांव में सिर्फ रहते हैं करोंड़पति, क्या आप जानते हैं इस गाँव नाम?

आमतौर पर जब किसी के पास पैसा-रुपया आ जाता है वो व्यक्ति गांव छोड़कर शहर की तरफ रुख कर लेता है। वहां की सुख-सुविधाएं उसे इतना मोह लेती हैं कि उसे गांव में धूल-मिट्टी के सिवा कुछ दिखता ही नहीं है। यही कारण है कि आज शहरों की आबादी बढ़ रही है और हमारी सांस्कृतिक धरोहर यानी की गांव, वहां की तहजीब, वहां के संस्कार सब खत्म हो रहे हैं।

लेकिन भारत में आज भी ऐसे गांव मौजूद हैं जहां शहरों के मुकाबले लोगों के लिए अधिक सुख-सुविधाए उपलब्ध हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही गांव के विषय में बताने जा रहे हैं जहां ज्यादातर लोग करोंड़पति हैं।

करोंड़पतियों का गांव

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इस गांव का नाम हिवरे बाज़ार है। यह महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के अंतर्गत आता है। इस गांव के ज्यादातर परिवार करोंड़पति हैं। यही कारण है कि यहां शहरों जैसा ही माहौल है और सुख-सुविधाएं भी उतनी ही हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब यहां के लोग इस गांव को छोड़कर जाने के लिए मजबूर हो गए थे।

80 के दशक में पड़ा था भयंकर सूखा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 80-90 के दशक में इस गांव में भयंकर सूखा पड़ा था। जिसकी वजह से यहां की जमीन बंजर हो चुकी थी और पीने का पानी सूख चुका था। लोग भूंख और प्यास से तड़प-तड़पकर मरने को तैयार थे। मौत के डर से कुछ लोगों ने इस गांव को छोड़ दिया और दूसरी जगह जाकर बस गए। हालांकि, कुछ लोगों ने पलायन की बजाए यहां रहकर समस्या का समाधान निकालना उचित समझा। उन दिनों गांववासियों ने नया सरपंच पोपट राव को चुना।

पोपट राव को बनाया गया सरपंच

जानकारी के अनुसार, पोपट राव ने सरपंच के पद पर बैठने के बाद उसकी गरिमा को बरकरार रखने के लिए गांव की सूरत बदलने का फैसला लिया। उन्होंने लोगों को कुएं, तालाब, पेड़ों आदि के महत्व को समझाया। इसके अलावा पोपट राव गांव में सरकारी योजनाओं को लाने के प्रयास में जुट गए। बताया जाता है कि साल 1994 में पोपट राव की मेहनत रंग लाई और हिवरे बाज़ार नामक इस गांव को आदर्श ग्राम योजना के तहत जोड़ दिया गया।

फसलों की अच्छी पैदावार शुरु हुई

सरकार के इस फैसले से गांव की तस्वीर बदलने की शुरुआत हुई। लोगों ने यहां की मिट्टी के हिसाब से फसल उगाना प्रारंभ किया जिसकी वजह से उन्हें अच्छी पैदावार मिलने लगी। कुछ ही सालों में यहां के लोगों की आमदनी इतनी बढ़ गई कि वे करोंड़पति हो गए।

80 परिवार करोंड़पति

मालूम हो, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस गांव की आबादी 1200 से अधिक है। इस गांव में 305 परिवार रहते हैं जिनमें 80 परिवार ऐसे हैं जो करोंड़पति हैं। वहीं, 50 से अधिक परिवारों की सालाना कमाई 10 लाख से अधिक है।

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