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कहानी उन 5 लोगों की जिन्होंने अपने हुनर से बदल डाली किस्मत

कहा जाता है दुनिया उगते सूरज को सभी सलाम करते हैं। हालांकि, कोई उस रात को याद नहीं करता जिससे यह सूर्य निकलने से पहले रोज़ लड़ता है। आज हम आपको भारत के उन इंडस्ट्रियलिस्ट्स के विषय में बताएंगे जिनकी किस्मत में गरीबी लिखी थी लेकिन उन्होंने अपने हुनर और मेहनत के दमपर सबकुछ बदल डाला

राहुल नार्वेकर

इंडियन रुट्स के फाउंडर राहुल नार्वेकर ने अपनी जिंदगी मे काफी संघर्ष किया। उनकी कहानी सभी के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कॉलेज के दिनों डिलीवरी बॉय से लेकर अस्पतालों में वार्ड बॉय तक का काम किया। जैसे-तैसे अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद राहुल ने TSN में काम किया। इसके साथ उन्होंने पूरे एशिया के पहले म्यूजिक चैनल ऑक्सीजन में भी काम किया।इसके बाद उन्होंने एक वेबसाइट का निर्माण किया जिसका नाम fashionandyou.com रखा। हालांकि, इस ई-कॉमर्स स्टोर में उनके साथ कई अन्य लोग शामिल थे जिनसे राहुल की बनी नहीं और वे इससे बाहर आ गए।
मौजूदा समय में राहुल इंडियन नेटवर्क के फाउंडर और सीईओ हैं। इसके अलावा उन्होंने एक नई कंपनी लॉन्च की है जिसका नाम उन्होंने स्केल वेंचर रखा है

कल्पना सरोज

कल्पना सरोज का जन्म एक दलित परिवार में हुआ था। यही कारण था कि लोग उन्हें कई बार ताने मारते थे, उन्हें आगे बढ़ने से रोकते थे। लेकिन कल्पना ने कभी हार नहीं मानी और टेलरिंग के बिजनेस से शुरुआत की। कुछ समय बाद जब उनका बिजनेस चल गया तो उन्होंने फर्नीचर का स्टोर शुरु किया।कुछ सालों बाद कल्पना की मेहनत रंग लाई और आज वे 112 मिलियन डॉलर की कंपनी की मालकिन हैं। इस दौरान उनकी कंपनी ने कई उतार-चढ़ाव झेले लेकिन कल्पना ने कभी हार नहीं मानी।

नितिन गोडसे

एक गरीब किसान परिवार में जन्म लेने वाले नितिन गोडसे का बचपना बड़ी कठिनाइयों से गुज़रा। उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए काफी जतन करने पड़े। इनमें सब्जी बेचना, लेबरी करना, सेल्समैन आदि शामिल हैं।
कॉलेज के दिनों में उनकी जॉब एक एग्रो कंपनी में लगी। यहां उन्होंने काफी कुछ सीखा। इसके बाद उन्होंने अपना काम डाला जिसमें उन्होंने ताजी सब्जियों का बिजनेस किया लेकिन वे सफल नहीं हुए। लेकिन नितिन ने हार नहीं मानी उन्होंने जीरो फंड के साथ Excel Gas and Equipments Pvt. Ltd की शुरुआत की थी। आज यह अपने क्षेत्र की टॉप 5 कंपनियों में शुमार है।

कर्सनभाई पटेल

निरमा के फाउंडर कर्सनभाई पटेल को भला कौन नहीं जानता। उन्होंने इसकी शुरुआत अपने घर के पीछे डिटर्जेंट पाउडर बनाकर की थी। वे घर-घर जाकर इसे बेचते थे। उन दिनों 1 किलों निरमा की कीमत 3.5रुपये हुआ करती थी। यही कारण रहा कि कर्सनभाई पटेल की मेहनत रंग लाई और यह विश्व की सुप्रसिद्ध डिटर्जेंट कंपनी बन गई।

पेट्रीशिया नारायण

अपने ड्रग एडिक्ट पति के दुर्व्यवहार से परेशान पेट्रीशिया जब अपने माता-पिता के पास पहुंची थी तब उन्होंने इन्हें अपनाने से मना कर दिया था। इसके बाद वे अपने दो बच्चों के साथ किराए पर रहने लगीं। इस दौरान उन्होंने अपना काम शुरु किया। वे घर-घर जाकर अचार, जैम जैसे प्रोडक्ट्स बनाकर बेंचती थी।
इसके बाद मुंबई के मरीना बीच पर उन्होंने एक स्टॉल खोला। लंबे संघर्ष के बाद आज चेन्नई में उनके 14 आउटलेट्स हैं जिनसे उन्हें रोज़ की 2 लाख रुपये की आमदनी हो रही है।

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