Breaking News

उधार से हुई थी हीरो साइकिल्स की शुरुआत, अब बन चुकी है अरबों की कंपनी

हम सबने बचपन में साईकिल चलाई है, कई बार इससे गिरे भी हैं। लेकिन साईकिल चलाने की होड़ ने हमें कभी दर्द का एहसास नहीं होने दिया। बचपन की इन्हीं खट्टी-मीठी यादों में एक नाम शामिल है हीरो साईकिल्स का। जी हां वही साईकिल जिसपर बैठकर हम खुद को शहंशाह समझते थे और ईलाके के दौरे पर निकलते थे।

आज हम आपको आपकी मन पसंद हीरो साईकिल्स के विषय में बताने जा रहे हैं कि आखिर इसकी शुरुआत कैसे हुई और यह इतनी पॉपुलर कैसे हुई। कहानी की शुरुआत होती है पाकिस्तान के कमालिया से। यहां के निवासी बहादुर चंद मुंजाल और ठाकुर देवी के घर चार लड़कों ने जन्म लिया था। इनका नाम सत्यानंद मुंजाल, ओमप्रकाश मुंजाल, ब्रजमोहनलाल मुंजाल और दयानंद मुंजाल था।

बहादुर चंद किराने की दुकान चलाया करते थे जिससे इनका घर चलता था। तफभी साल 1947 में भारत आज़ाद हुआ और खबर आई कि भारते को दो हिस्सों में विभाजित किया जाएगा। जिसके बाद पाकिस्तान में रह रहे सभी हिंदू हिंदुस्तान की तरफ भागने लगे। इन्हीं में शामिल था मुंजाल परिवार। ये लोग बंटवारे के बाद पंजाब के लुधियाना में आकर बस गए।

real success story of hero cycles and munjal brothers

अब इनके सामने रोजगार सबसे बड़ी समस्या बनकर खड़ा था। ऐसे में मुंजाल भाईयों ने परिवार की जिम्मेदारी उठाते हुए साईकिल के पार्ट्स बेचना चालू किया। धीरे-धीरे उनका काम ठीक चलने लगा तो उन्होंने इन्हें थोक में खरीदकर बेचना शुरु कर दिया। इससे उनकी मार्केट में पहचान स्थापित होने लगी। इसके अलावा उन्हें समझ में आ गया था
कि इस बिजनेस में वे आगे तक जा सकते हैं। इसलिए उन्होंने पार्ट्स खरीदने की यूनिट लगाकर पार्ट्स बनाने का फैसला लिया।

इसके लिए मुंजाल भाईयों ने साल 1956 में बैंक से 50 हजार रुपए का कर्ज लिया और अपना व्यापार शुरु कर दिया। लुधियाना में शुरु हुई इस साईकिल यूनिट का नाम उन्होंने हीरो रखा। कुछ समय बाद उन्होंने पार्ट्स के साथ-साथ साईकिल बनाने का काम भी शुरु कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआत में हीरो साईकिल्स की यूनिट में एक दिन में 25 साईकिलों का निर्माण होता था। बाद में जैसे-जैसे उनका व्यापार बढ़ता गया यह आंकड़ा बढ़ता गया। साल 1966 में मुंजाल भाईयों की ये कंपनी एक साल में एक लाख साईकिलें तैयार करती थीं। यह कारवां दिन-रात बढ़ता ही जा रहा था।

हद तो तब हो गई जब मुंजाल भाईयों ने 1986 में एक साल में 22 लाख साईकिलें तैयार करके वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित कर दिया। इस वजह से हीरो साईकिल्स का नाम गिनीज बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया था। अब तक साईकिलों की दुनिया में मुंजाल ब्रदर्स द्वारा शुरु की गई हीरो साईकिल्स एक बड़ी कंपनी बन चुकी थी। इनका यह बिजनेस सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं था बल्कि मध्य पूर्व, अफ्रीका, एशिया और यूरोप के 89 देशों में कंपनी साइकिलों का निर्यात कर रही थी।

गौरतलब है, मुंजाल भाईयों द्वारा शुरु की गई इस कंपनी ने समय के साथ खुद को बदलने का भी फैसला किया। यही कारण था कि साल 1984 में हीरो ने जापान की सुप्रसिद्ध दो पहिया वाहन निर्माता कंपनी होन्डा से हाथ मिला लिया और भारत में हीरो होन्डा मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की।

जानकारी के अनुसार, दो कंपनियों के समूह ने 13 अप्रैल 1985 में पहली बाइक CD 100 लॉन्च की थी जो कि अपने दमदार माइलेज के लिए आज भी जानी जाती है। तकरीबन 27 सालों तक एक साथ व्यापार करने के बाद साल 2011 में हीरो और होन्डा ने अलग होने का फैसला लिया। इसके बाद हीरो ने हीरो मोटोकॉर्प नाम से नई शुरुआत की।

मालूम हो, इस व्यापार की शुरुआत चारों भाईयों ने साथ में की थी। साल 1960 में इनके सबसे बड़े भाई दयानंद मुंजाल ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। वहीं अन्य तीनों भाइयों ने 1 वर्ष के अंदर ही अपने प्राण त्याग दिए। 13 अगस्त 2015 को ओमप्रकाश मुंजाल, 1 नवंबर 2015 को बृजमोहन लाल मुंजाल और 14 अप्रैल 2016 को सत्यानंद मुंजाल का देहावसान हो गया। अब हीरो की कमान मुंजाल परिवार के वारिस पंकज मुंजाल के हाथ में है।

About Editorial Team

Check Also

1800 करोंड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ यदाद्रि मंदिर, दरवाजों पर लगा है 125 किलो से अधिक सोना

साउथ इंडिया के मंदिरों की बात ही निराली होती है। यहां के लोगों में ईश्वर …

Leave a Reply

Your email address will not be published.