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पति-पत्नी के प्यार की अनोखी दास्तां, सबकुछ दांव पर लगाकर बचाई बीवी की ज़िंदगी

कहते हैं मोहब्बत इंसान को जानवर से इंसान बना देती है, वहीं कुछ लोग ये कहते हैं कि इंसान को जानवर बनाने में मोहब्बत बहुत बड़ा रोल निभाती है। हालांकि, उम्र के किसी न किसी पड़ाव पर इंसान को प्यार हो ही जाता है। फिर चाहें शादी के पहले हो या शादी के बाद। इंसान अपने इस प्यार के खातिर कुछ भी हारने या कुछ भी करने को तैयार हो जाता है।

आज हम आपको ऐसे ही एक मामले के विषय में बताने जा रहे हैं जिसमें एक युवक ने अपनी पत्नी के प्यार में अपना सबकुछ गिरवी रख दिया लेकिन बीवी की जान बचा ली।

पत्नी की हालत बिगड़ी

बता दें, प्यार की यह अनोखी दास्तां राजस्थान के पाली के खैरवा गांव निवासी डॉ. सुरेश चौधरी और उनकी पत्नी की है। वे इस वक्त पीएचसी में पोस्टेड हैं। उनकी पत्नी और पांच वर्षीय बेटा गांव में ही रहते हैं। बात 2021 मई की है। इन दिनों देश में कोरोना की दूसरी लहर अपने चरम पर थी। इस दौरान सुरेश लोगों की जान बचाने में लगे हुए थे। तभी एक दिन अचानक से उन्हें खबर मिली कि उनकी पत्नी को तेज़ बुखार आया हुआ है। जांच कराने पर 14 मई को उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी कोरोना पॉजिटिव हैं जिसकी वजह से उनकी हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी।

सुरेश ने अपनी पत्नी को जोधपुर एम्स में भर्ती कराया। इसके बाद डॉक्टरों ने उनका इलाज प्रारंभ किया। इस बीच सुरेश दो दिन बाद अपने एक रिश्तेदार को पत्नी की देखभाल के लिए एक रिश्तेदार को अस्पताल में छोड़कर ड्यूटी पर चले गए।

प्राइवेट अस्पताल में करवाया भर्ती

लेकिन उनकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। सुरेश जब 30 मई को लौटे तो उन्होंने देखा कि उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ गई थी। उन्हें छोटे वेंटिलेटर पर रखा गया था। उनके लंग्स का 95% हिस्सा खराब हो चुका था। डॉक्टरों ने उनके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन सुरेश ने हार नहीं मानी। उन्होंने सबसे पहले अपनी पत्नी को अहमदाबाद के प्राइवेट हॉस्पिटल जायड्स में भर्ती करवाया।

70 लाख में गिरवी रखी MBBS की डिग्री

यहां डॉक्टर्स ने उनका इलाज शुरु किया। इस दौरान अनीता के हार्ट और लंग्स ईसीएमओ मशीन के सहारे चल रहे थे। इस सबके बीच अनीता के इलाज में रोजाना एक लाख रुपये का खर्च हो रहा था। इस सबके बावजूद सुरेश ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी पत्नी को बचाने का दृढ़ निश्चय कर लिया था। इसके लिए उन्होंने बैंक से 70 लाख का कर्ज लिया जिसके बदले उन्होंने अपनी एमबीबीएस की डिग्री गिरवी रखी।

87 दिनों बाद सुरेश की उम्मीद रंग लाई, अनीता की हालत में सुधार होने लगा। वे बोलने-चालने लगीं। कुछ दिनों बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई।

सात जन्मों का वादा

गौरतलब है, सुरेश ने अपनी पत्नी की तबीयत को लेकर बात करते हुए बताया कि, मैंने अपनी पत्नी से सात जन्म तक साथ निभाने का वादा किया है। इसीलिए मैं अनीता को अपनी आंखों के सामने कैसे मरने देता। वे आगे कहते हैं कि पैसे तो फिर कमा लेंगे लेकिन अनीता को कुछ हो जाता तो मैं भी जिंदा नहीं रह पाता।

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