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महाराष्ट्र में खुला पत्नी पीड़ित पुरुष आश्रम, बीवी के अत्याचारों से हैं परेशान तो जल्दी पहुंचे

वो दौर दूसरा था ये दौर दूसरा है। अल्ताफ राजा के गाने की यह लाइन पति-पत्नियों के रिश्तों पर पूरी तरह से फिट बैठती है। अब आप सोंच रहे होंगे वो कैसे? इसका जवाब है कि एक ज़माने में पत्नियों पर उनके पति अत्याचार करते थे, उन्हें मारते-पीटते थे। उनकी इच्छाओं की कभी कद्र नहीं करते थे। लेकिन अब ज़माना बदल गया है, अब पत्नियां अपने पतियों पर अत्याचार करती हैं। उनके साथ मारपीट करती हैं। उन्हें परेशान करती हैं।

सुनकर आपको भले ही ये सब अजीब लगे लेकिन यह बात बिल्कुल सच है कि कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनमें पत्नियां अपने मायके वालों का सहारा लेकर पति का जीना हराम कर देती हैं। ऐसे ही पत्नी के अत्याचारों से पीड़ित पतियों के लिए महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले से 12 किमी की दूरी पर पत्नी पीड़ित पुरुष आश्रम खोला गया है।

इस आश्रम में अपनी पत्नी से परेशान कई पति यहां आकर रहते हैं। यहां उनकी परेशानी सुनी जाती है और उन्हें कानूनी सलाह भी दी जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आश्रम में छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी तमाम पीड़ित पति आते हैं। यहां उन्हें कानूनी सलाह दी जाती है जिससे कि वे अपनी पत्नी के खिलाफ आवाज़ उठा सकें।

जानकारी के मुताबिक, यहां पीड़ित पतियों के रहने-खाने की भी व्यवस्था है। यहां रहने वाला हर पीड़ित अपना खर्च खुद उठाता है। शनिवार और रविवार को शाम 10 बजे इन पतियों की काउंसलिंग की जाती है।

गौरतलब है, यहां जो भी पुरुष आते हैं उन्हें कानूनी सलाह उनकी समस्या के हिसाब से दी जाती है। पहले इन पुरुषों को तीन कैटेगरी में बांटा जाता है। पहली कैटेगरी है A, इसमें पत्नी और सुसरालवालों के अत्याचारों से परेशान पतियों को रखा जाता है। B और C में इससे कम पीड़ितों को रखा जाता है। संस्था का दावा है कि अब तक 500 से अधइक पति यहां आकर कानूनी सलाह ले चुके हैं और दिन-प्रतिदिन यह संख्या बढ़ रही है।

तस्वीरों में बाहर से देखने पर यह एक छोटा सा कमरा मालूम पड़ता है लेकिन अंदर जाने पर पता चलता है कि यह कितना बड़ा है। इसका डिजाइन एक आश्रम की तरह ही बनाया गया है। इसमें सबसे खास बात है यहां रखा एक बड़ा सा कौआ। यह कौआ थर्मोकोल से बना हुआ है। रोज इसकी यहां रहने वाले लोग पूजा करते हैं।

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