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पुरानी बसों से इस कपल ने तैयार किया पब्लिक टॉयलेट, जानिये कौन हैं ये

आपने अक्सर देखा होगा कि इस देश में जो महिलाएं बाहर काम करती हैं उन्हें वॉशरुम आदि की समस्या से जूझना पड़ता है। कई बार महिलाएं घर से ही फ्रैश होकर चलती हैं ताकि रास्ते में उन्हें दिक्कत न हो। ऐसा इसलिए क्योंकि पुरुषों के लिए तो इस दुनिया में व्यवस्था हो जाती है लेकिन महिलाओं को आसानी से फ्रैश होने की जगह नहीं मिलती है।

यही कारण है कि कई बार महिलाओं को टॉयलेट रोककर रखनी पड़ती है, जिसकी वजह से उन्हें गैस आदि की समस्या हो जाती है। महिलाओं की इसी समस्या के मद्देनज़र पुणे के एक कपल ने ती टॉयलेट का कॉन्सेप्ट लॉन्च किया है। इसके तहत पुरानी पड़ी बसों को टॉयलेट में कन्वर्ट कर दिया जाता है जिसका राह चलती महिलाएं उपयोग करती हैं।

बता दें, ती टॉयलेट की शुरुआत पुणे के एक कपल द्वारा साल 2016 में की गई थी। शहर के उल्का सादलकर और राजीव खेर ने स्वच्छता अभियान के तहत इस कॉन्सेप्ट पर काम करना प्रारंभ किया था।

शुरु की कंपनी

इसके लिए सबसे पहले उन्होंने साराप्लास्ट प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी की स्थापना की। इस कंपनी के तहत पुरानी और खराब पड़ी बसों को टॉयलेट के आकार में तब्दील कर दिया जाता है।

विदेशी एनजीओ से लिया आइडिया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बसों को टॉयलेट में कन्वर्ट करने का आइडिया राजीव और उल्का को सैन फ्रांसिस्को के एक एनजीओ से मिला था। दरअसल, यह एनजीओ इस तकनीक से पुरानी बसों को टॉयलेट में तब्दील कर देता था जिससे महिलाओं को होने वाली दिक्कतों का निवारण आसानी से किया जा सकता था।

साल 2016 में उल्का और राजीव ने भी इस कॉन्सेप्ट पर काम करना प्रारंभ किया और 12 बसों को टॉयलेट में कन्वर्ट किया। इन सार्वजिनक शौचालयों को कपल ने ती टॉयलेट नाम दिया। बता दें, मराठी में ती कहकर महिलाओं और लड़कियों को संबोधित किया जाता है।

5 रुपये में यूज़ कर सकते हैं ती टॉयलेट

इस टॉयलेट को इस्तेमाल करने के लिए महिलाओं को महज़ 5 रुपये देने पड़ते हैं। इनमें वेस्टर्न के साथ-साथ इंडियन वॉशरुम भी उपलब्ध है। इसके अलावा इसमें छोटे बच्चों को दूध पिलाने के लिए फीडिंग रूम, सैनिटरी पैड्स और पैकेज्ड फूड खरीदने की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसके लिए बस में एक महिला अटेंडेंट भी रहती है। टी टॉयलेट के साथ एक छोटा-सा कैफे भी अटैच है, जिसमें खाने-पीने से संबंधित सामान मिलता है।

जानकारी के अनुसार, ती टॉयलेट में बिजली के लिए सोलर पैनल का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, बरसात के दिनों में ग्रिड का उपयोग किया जाता है। धीरे-धीरे उल्का और राजीव का यह प्रयोग सार्थक रुप ले चुका है। पुणे में इस तरह के कई टॉयलेट्स का निर्माण किया जा चुका है जिनमें महिलाओं की सुविधाओं का खास ख्याल रखा गया है।

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