Breaking News

बच्चों के लिए हानिकारक होती हैं माता-पिता की ये गलतियां, भूलकर भी न करें

दुनिया के हर मां-बाप यही चाहते हैं कि उनका बच्चा कामयाब हो, वह बड़ा होकर एक अच्छा इंसान बने। इसके लिए वे उसका अच्छे स्कूल में दाखिला करवाते हैं, उसकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान देते हैं। उसकी संगत पर नज़र रखते हैं।

लेकिन कई बार इस सबके बीच माता-पिता अपने सपनों को उसपर थोप देते हैं। उनका मानना होता है कि जो वे अपनी जीवन में नहीं कर पाए वो उनका बेटा या बेटी करके दिखाएगा। यही कारण है कि लोगों को कई बार उनके बच्चे जब उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाते हैं तो उन्हें तकलीफ होती है। आज हम आपको ऐसी ही कुछ गलतियों के विषय में बताने जा रहे हैं जिनका बच्चों की परवरिश के वक्त माता-पिता को विशेष ध्यान रखना चाहिए।

उम्मीद

कई बार पेरेंट्स बचपन से ही बच्चे पर क्लास में फर्स्ट आने का दवाब बनाने लगते हैं। दूसरों के बच्चे को देखते हुए वे अपने बच्चों पर भी क्लास में टॉप करने की उम्मीद लगाने लगते हैं। कई बार माता-पिता की यह उम्मीद दवाब में तब्दील हो जाती है, इस बात का उन्हें खुद अंदाज़ा नहीं लगता।

धीरे-धीरे बच्चे पर माता-पिता का यह दवाब बोझ बन जाता है जिसकी वजह से उसके शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा उत्पन्न होने लगती है। यही कारण है कि बच्चे कई बार छोटी उम्र में ही गुमसुम और मायूस रहने लगते हैं।

मारपीट

कई बार बच्चों के गलती करने पर माता-पिता उन्हें समझाने के बजाए उनपर हाथ उठाते हैं। उन्हें सज़ा के तौर पर मारते हैं। इससे धीरे-धीरे वे बेशर्म हो जाते हैं। कई बार बच्चों पर इस मारपीट का बुरा असर भी पड़ता है। वे गलती करने पर आपको सच्चाइई बताने से डरने लगते हैं। इससे बच्चे और पैरेंट्सके बीच की दूरी बढ़ने लगती है।
इसलिए गलती करने पर बच्चों को मारने की बजाए उन्हें प्यार से समझाएं। इससे आपके बीच एक अच्छा बॉन्ड स्थापित होगा।

रोक-टोक

आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ माता-पिता बच्चों पर शुरु से रोक-टोक लगाना शुरु कर देते हैं। उन्हें बाहर जाने से रोकते हैं। किसी से मिलने से रोकते हैं। ऐसा करने से बच्चों का सामाजिक विकास रुक जाता है। बढ़ती उम्र के साथ बच्चों की जिज्ञासा भी बढ़ती है, इसलिए बच्चों को थोड़ी तो आजादी आपको अवश्य देनी ही चाहिए। इससे उनके मानसिक विकास में थोड़ी वृद्धि होती है और उन्हें गलत-सही का फर्क समझ में आता है।

समय व्यतीत करें

आज की इस दौड़-भाग भरी जिंदगी में लोगों के पास अपने बच्चों के लिए ज़रा भी टाइम नहीं होता है। वे जीवनोपार्जन की क्रिया में इतना मशरुफ हो जाते हैं कि उन्हें ज़रा भी अपने बच्चों का ख्याल नहीं रहता है। यही कारण है कि बच्चे गलत दिशा में जाने लगते हैं और माता-पिता को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं लग पाता है।

About Editorial Team

Check Also

1800 करोंड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ यदाद्रि मंदिर, दरवाजों पर लगा है 125 किलो से अधिक सोना

साउथ इंडिया के मंदिरों की बात ही निराली होती है। यहां के लोगों में ईश्वर …

Leave a Reply

Your email address will not be published.