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शरीर से अपंग होने के बावजूद बदली 13 हज़ार दिव्यांगों की किस्मत!

कई बार लोग बचपन में ही तय कर लेते हैं कि उन्हें भविष्य में क्या करना है और कैसे करना है। इसके लिए वे दिन-रात प्रयास भी करते हैं। हालांकि, कई बार उनकी किस्मत ने उनके लिए कुछ और सोंच रखा होता है। आज हम आपको ऐसी ही एक महिला के विषय में बताने जा रहे हैं जिसने शारीरिक अपंगता के बावजूद कभी हार नहीं मानी। इस महिला का नाम नसीमा मोहम्मद अमीन हुजुर्क है। ये महाराष्ट्र के कोल्हापुर की रहने वाली हैं। आज उनकी उम्र 69 साल हो चुकी है।

17 की उम्र में खोए पैर

मीडिया के रिपोर्ट्स के मुताबिक, नसीमा जब 17 साल की थी उस वक्त उनके पैर खराब हो गए थे जिसकी वजह से वे चलने में असमर्थ हो गईं थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी वे आगे बढ़ती रहीं। आज वे पीड़ित लोगों की मदद करने में जुटी हुई हैं। जानकारी के मुताबिक, साल 1984 में उन्होंने हेल्पर्स ऑफ़ द हैंडिकैप्ड कोल्हापुर नामक संस्था की स्थापना की थी। इस संस्था की मदद से उन्होंने अब तक 13 हजार से अधिक दिव्यांग लोगों की मदद की है।

एथलीट बनना चाहती थीं

मालूम हो, नसीमा पैराप्लेज़िया नामक बीमारी से पिछले कई सालों से जूझ रही हैं। इस बीमारी में इंसान के दोनों पैर आंशिक रूप से या पूरी तरह पैरालाइज़ हो जाते हैं। बता दें, नसीमा बचपन में एक एथलीट बनना चाहती थीं लेकिन एक बीमारी से ग्रसित होने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई।

सामाजिक संस्था की करी शुरुआत

हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपना ग्रेजुएशन कंप्लीट किया उसके बाद सेंट्रल एक्साइज़ एंड कस्टम्स विभाग में नौकरी शुरु कर दी। सारी जिंदगी की कमाने के बाद जो पैसे उन्हें मिले उससे उन्होंने‘अपंग पुनर्वासन संस्थान’ खोल लिया। इस संस्थान में लकवाग्रस्त लोगों को रहने के लिए छत मिलती है।

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