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बच्ची के लिए मां ने दी किडनी की कुर्बानी, रोबोट से हुआ ट्रांसप्लांट

माना जाता है कि भगवान हर जगह नहीं पहुंच सकते थे इसलिए उन्होंने मां को बना दिया। मां अपने बच्चे के लिए मौत से भी लड़ जाती है। उसका प्यार और त्याग अपने बच्चे के लिए सबसे अमूल्य गहना होता है जिसे वह हर परिस्थिति में धारण करके रखती है। आज हम आपको ऐसी ही एक मां-बेटी के विषय में बताने जा रहे हैं जहां एक मां ने अपनी बच्ची के लिए अपनी किडनी तक दान दे दी।

बता दें, यह मामला बेंगलुरु से सामने आया है। यहां के निजी अस्पताल में एक मां ने अपनी 12 वर्षीय बेटी की जान बचाने के लिए अपनी किडनी की कुर्बानी दे दी।

1 साल से डायलिसिस पर थी बच्ची

जानकारी के अनुसार, यह ऑपरेशन बेंगलुरु के फोर्टिस अस्पताल में हुआ है। हॉस्पिटल के यूरोलॉजी, यूरो ऑन्कोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांट और रोबोटिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉक्टर, डॉ मोहन केशवमूर्ति और डॉ श्रीहर्ष हरिनाथ ने 12 वर्षीय बच्ची की किडनी का ट्रांसप्लांट कर उसे जिंदगी बख्शी है। उन्होंने बताया कि मासूम बच्ची पिछले 1 साल से डायलिसिस पर चल रही थी।

इस विषय में मीडिया से बात करते हुए डॉ. मोहन केशवमूर्ति ने कहा कि “इस बच्ची का ल्यूपस नेफ्रैटिस नामक बीमारी के साथ-साथ उच्च रक्तचाप का निदान करने के साथ साथ 26% के इजेक्शन फ्रैक्शन (ईएफ) के साथ कार्डियोमायोपैथी की गई थी।”

जानकारी केमुताबिक, ल्यूपस नेफ्रैटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है। यह बीमारी प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा ऑटोएंटीबॉडी नामक प्रोटीन के उत्पादन के का कारण बनती है, जो कि गुर्दे या अन्य किसी अंग के लिए काफी घातक साबित होती है। डॉक्टरों का मानना है कि इस तरह की बीमारी से जूझने वाले ज्यादातर बाल रोगी हृदय रोग की वजह से जल्दी मर जाते हैं। इनकी मृत्यु दर लगभग 34 प्रतिशत है। वहीं, डायलिसिस के बावजूद मरने वालों की संख्या 34 प्रतिशत है।

मां ने दी किडनी की कुर्बानी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिन-प्रतिदिन बच्ची की हालत बिगड़ती जा रही थी जिसकी वजह से उसका पूरा परिवार परेशान था। इस बीच बच्ची की मां ने फैसला लिया कि वह अपनी किडनी उसे दान देगी।

यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ मोहन केशवमूर्ति ने बताया कि “बच्ची की हालत बिगड़ती जा रही थी। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बच्ची की मां ने अपनी किडनी दान करने का फैसला किया, जिससे कि वह अपनी बेटी को एक नया जीवन दे सके। उन्होंने आगे कहा कि इस सर्जरी को लैप्रोस्कोपिक असिस्टेड डोनर नेफरेक्टोमी और दा विंची शी रोबोट असिस्टेड पीडियाट्रिक रीनल ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ता सर्जरी सफलतापूर्वक की है। फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर्स का कहना है कि “रोबोट असिस्टेड पीडियाट्रिक ट्रांसप्लांट का यह पहला उदाहरण है। गौरतलब है, बच्ची की हालत पहले के मुकाबले ज्यादा नॉर्मल है। अब वह चल-फिर भी आसानी से सकती है।

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