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गूगल की नौकरी छोड़कर इस इंसान ने उठाया तालाबों और झीलों को बचाने के लिए कदम

आपने अक्सर देखा होगा कि हमारे आस-पास तालाबों या झीलों में गंदगी का अंबार लग जाता है। लोग इनमें कूड़ा-करकट आदि डालकर इसे पूरी तरह से खराब कर देते हैं। ऐसे में जल को लेकर संकट बढ़ना तो लाज़मी है। सरकार इस संकट से जूझने के लिए लगातार कोशिस कर रही है लेकिन जब तक देश का नागरिक अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग नहीं होगा तब तक बदलाव आना मुश्किल है। आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के विषय में बताने जा रहे हैं जिन्होंने प्रकृति को हो रहे नुकसान को भंपते हुए उसे बचाने का निर्णय किया।

गूगल की नौकरी छोड़ी

इस व्यक्ति का नाम अरुण कृष्णमूर्ति है। चेन्नई निवासी अरुण पर्यावरणविद् हैं। उन्हें प्रकृति से बहुत लगाव है। इस बात की तस्दीक उनके द्वारा किए जा रहे प्रयास खुद—खुद कर देते हैं। उन्होंने प्रक्रति को बचाने के लिए गूगल जैसी बड़ी कंपनी की नौकरी को ठुकरा दिया और लग गए नदी और तालाबों की सफाई में। अरुण अभी तक 14 राज्यों में जल के 93 स्रोतों की कायापलट कर चुके हैं जिसमें 39 झीलें और 48 तालाब शामिल हैं।

बता दें, साल 2007 में पानी के संरक्षण के उद्देश्य से ईएमआई नामक संस्था की शुरुआत की थी। इसके पीछे उनका उद्देश्य था कि कैसे भी करके जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित किया जाए। इस संस्था से जुड़ने वाले लोग अलग-अलग राज्यों में खराब पड़ी झीलों, नदियों और तलाबों को सुधारने का प्रयत्न करते दिखते हैं।

सरकार से नहीं मिला कोई लाभ

32 वर्षीय अरुम ने आज अपने प्रयासों से अपनी इस संस्था को ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया है। आज हज़ारों लोग उनकी इस संस्था से जुड़कर प्रक्रति को बचाने के उद्देश्य के तहत कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसके लिए उन्हें केंद्र या राज्य सरकार की तरफ से किसी भी तरह का कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलता है लेकिन वे प्रकृति बचाने के लिए मेहनत करते हैं।

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