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अध्यापक की नौकरी छोड़कर फैमिली बिजनेस को बढ़ाने का लिया फैसला, आज कमा रहे 1 लाख महीना

आमतौर पर हर नौकरी करने वाला शख्स यही सोंचता है कि बहुत हुआ अब वह इस नौकरी को छोड़ देगा और अपना कुछ काम शुरु करेगा। लेकिन वो कहते हैं न कहने और करने में काफी फर्क होता है। यही कारण है कि कुछ लोग आजीवन यह सोंचते रह जाते हैं जबकि कुछ लोग इसे सच साबित करके दिखाते हैं।

ऐसा ही कुछ तमिल नाडु के करुर निवासी मोहन कुमार ने कर दिखाया है। 27 वर्षीय यह शख्स उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गया है जो हर रोज़ अपने बॉस की गाली खाने के बाद ये सोंचते हैं कि आज वे ये नौकरी छोड़ देंगे लेकिन किन्हीं कारणों की वजह से वे रिज़ाइन नहीं कर पाते हैं।

ग्रेजुएशन के बाद बने प्रोफेसर

लेकिन मोहन इनमें से नहीं हैं उन्होंने एक बार जो सोंच लिया वो कर दिखाया। बता दें, बचपन से ही मोहन दृढ़ निश्चयी थे। उन्होंने 12वीं पास करने के बाद सोंच लिया था कि वे इंजीनियरिंग में अपना करियर बनाएंगे। उन्होंने ग्रेजुएशन के बाद इंजीनियरिंग के एक कॉलेज में प्रोफेसर के रुप में नौकरी कर ली। यहां उन्हें अच्छा वेतन मिलता था।

हालांकि, मोहन का मन इस सबसे संतुष्ट नहीं था। वे अपने जीवन में कुछ अलग और बड़ा करना चाहते थे। इसलिए एक दिन उन्होंने फैसला किया कि क्यों न अपने फैमिली बिजनेस को बढ़ाया जाए।

प्रोफेसर के पद से दिया इस्तीफा

मालूम हो, मोहन के पिता सेल्वारानी की गांधीग्राम में एक फिश फ्राई की दुकान थी। मोहन ने असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी से इस्तीफा देने का फैसला किया और अपने पिता का काम में हाथ बंटाने का फैसला किया।

मोहन के इस फैसले का पूरे गांव ने विरोध किया, यहां तक उनके माता-पिता भी खिलाफ हो गए। लेकिन मोहन ने सभी का डटकर सामना किया और काम की शुरुआत की।

महीने की कमाई 1 लाख

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धीरे-धीरे मोहन ने अपने कौशल से बिजनेस को दिन दुगुना रात चौगुना ऊपर उठा दिया। अब वे दिन में दो से तीन टन मछली बेंच लेते हैं जिससे उनकी महीने की कमाई 1 लाख से ज्यादा की होती है।

एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान मोहन ने बताया था कि उनका यह सफर आसान नहीं रहा। उन्हें आलोचनाओं के साथ-साथ व्यापार में घाटा भी सहना पड़ा था। मोहन ने बताया था कि एक बार उनकी मां की तबियत खराब हो गई थी जिसकी वजह से उन्हें दुकान भी बंद करनी पड़ गई थी।

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