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मुस्लिम व्यक्ति ने हिंदू दोस्त के लिए डोनेट कर दी किडनी

अक्सर चौक-चौराहों और गली-नुक्कड़ों पर दो धर्मों को लेकर अलग-अलग तरह की बाते होती हैं। इन बातों में कुछ एक धर्म विशेष का समर्थन करते नज़र आते हैं जबकि कुछ उसका विरोध। इस तरह की बातें आज की तारीख में बढ़ गई हैं। कई ऐसी घटनाएं देश के अलग-अलग कोनों से सामने आ चुकी हैं जिनमें बहुसंख्कों ने अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार किया है।
हालांकि, इस सबके बावजूद हिंदुस्तान एक है। हमारा देश दुनिया में एकता का परचम लहारता नज़र आता है।
इसका प्रबल उदाहरण पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले से सामने आया है। यहां के निवासी हसलू मोहम्मद ने अपने अजीज़ मित्र अचिंत्य बिस्वास को किडनी दान देकर दोस्ती की नई इबारत लिखी है।

किडनी डोनेट करने के लिए दिया आवेदन

बता दें, हसलू ने हाल ही में राज्य स्वास्थ्य विभाग में आवेदन दिया था जिसमें उन्होंने अपनी किडनी दान करने की इजाजत मांगी थी। इसपर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से क्षेत्रीय पुलिस को नोटिस जारी कर हसलू की जांच के आदेश दिए थे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए नोटिस में पुलिस को यह आदेश दिया गया था कि वे चेक करें कि हसलू किडनी के बदले पैसों का लेनदेन तो नहीं कर रहा है। इसपर स्थानीय पुलिस ने जांच की तो पता चला कि हसलू ने किडनी के लिए किसी भी प्रकार का कोई आर्थिक लाभ नहीं लिया है।

कंपनी में हुई थी मुलाकात

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हसलू और अचिंत्य एक छोटी कंपनी में कार्यरत थे। यहां दोनों की मुलाकात एक साथ में काम करने वाले वर्कर के रुप में हुई थी। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती बढ़ गई और वे गहरे दोस्त बन गए। बताया जाता है कि 2 साल पहले हसलू ने फाइंनेंस कंपनी में नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने अपना व्यापार शुकु किया। इस दौरान हसलू और अचिंत्य की दोस्ती बरकरार रही।

हसलू ने दान की दोस्त को किडनी

कुछ दिनों पहले हसलू को पता चला कि उसका अजीज़ दोस्त अचिंत्य किडनी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। इसलिए उसे किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है। हालांकि, उसे किडनी डोनेटर नहीं मिल रहा था। अपने दोस्त की ऐसी हालत देखकर हसलू से रहा नहीं गया और उन्होंने अपने दोस्त की जिंदगी बचाने के लिए उसे अपन किडनी दान देने का फैसला किया।

दोस्ती पर नाज़ है

गौरतलब है, अचिंत्य को जब इस बात का पता चला तो वे काफी खुश हुए। उन्होंने अपनी और हसलू की दोस्ती पर नाज़ हुआ। अंचित्य ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, मैं और मेरी फैमिली उनका यह एहसान कभी नहीं चुका पाएंगे। अगर हसलू आगे नहीं आता तो मेरे जाने के बाद मेरा पूरा परिवार बिखर जाता।

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