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16 घंटों तक मलबे के नीचे जूझता रहा शख्स, कड़ी मशक्कत के बाद NDRF ने बचाई जान

कहा जाता है कि जाको राखे साइंया, मार सके न कोई। इस कहावत को साबित करता हुआ एक मामला इन दिनों गुरुग्राम से सामने आया है। गुरुवार को जिले के सेक्टर 109 स्थित चिंन्टेल्स पैराडीसो नामक अपार्टमेंट की छत गिर गई जिसकी वजह से इसके नीचे वाले फ्लोर्स की भी छत ढह गई। इस दौरान पहले माले पर रहने वाले अरुण श्रीवास्तव और उनकी पत्नी मलबे के नीचे दब गए थे।

60 वर्षीय पति-पत्नी दबे मलबे के नीचे

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अरुण का घर बिल्डिंग के पहले माले पर स्थित था। तभी ऊपर से गिरने वाला सारा मलबा उनके घर की छत पर जा गिरा जिसमें वे और उनकी पत्नी दब गए। बताया जा रहा है कि 60 वर्षीय अरुण और उनकी पत्नी फ्लैट डी-103 में मलबे के नीचे तकरीबन 16 घंटे तक दबी रहीं। सूचना मिलने पर नेशनल डिज़ास्टर रेस्पॉन्स फ़ोर्स (एनडीआरएफ) की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला।

जानकारी के अनुसार, रेस्कयू ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर्स की टीम अरुण को रातभर जगाए रखने की कोशिश में जुटी रही। टीम के प्रमुख, डॉ. राजेश यादव ने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि, ‘हम रातभर उनसे बातें करते रहे। वो काफ़ी घबराए हुए थे। हमने उन्हें आश्वासन दिया कि जल्द ही उन्हें निकाल लिया जाएगा। उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए हमने कहा कि रेस्कयूर्स जल्द ही उन तक पहुंचने वाले हैं। वो खाने-पीने को राज़ी नहीं थे इसीलिए हमने उन्हें इंट्रावेनस ड्रिप्स दिए।’

वहीं, एनडीआरएफ के एक अधिकारी ने इस घटना के विषय में बातचीत करते हुए बताया कि, ‘हमने पहले मलबे को स्टेबिलाइज़ करने की कोशिश की। इसके साथ ही मेडिकल टीम विक्टिम को स्टेबिलाइज़ करने की कोशिश कर रही थी। हमने ऑपरेशन में माउंटेनियरिंग रोप टेक्निक और एयर लिफ़्टिंग बैग्स का इस्तेमाल किया।’

हालांकि, सबकुछ आजमाने के बावजूद जब अरुण को मलबे से बाहर निकालने के सारे तरीके नाकामयाब साबित हुए तब मेडिकल टीम के प्रमुख डॉक्टर राजेश यादव ने एक लीटर हल्का गर्म नारियल का तेल मंगवाकर उसे लुब्रिकेन्ट की तरह अरुण के पैरों पर इस्तेमाल किया।

नारियल तेल की मदद से निकाला अरुण को बाहर

इस दौरान अरुण को इंट्रामस्कुलर पेनकिलर्स और सेडेटिव पिल्स दी गईं जिससे पैर को निकालते वक्त अरुण को दर्द न हो। दवा खाने के तकरीबन 20 मिनट बाद टीम ने अपना काम शुरु किया और नारियल तेल की मदद से अरुण का पैर मलबे के नीचे से निकाल लिया।

गौरतलब है, 16 घंटों तक मलबे के नीचे दबे रहने के बाद अरुण को बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद उन्होंने मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी जांच की गई। डॉक्टर्स ने बताया कि मलबे की वजह से उनके दायें कंधे में फ्रैक्चर हुआ है जबकि उनके दोनों पैर पूरी तरह से सलामत हैं।

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