Breaking News

‘रक्त सैनिक’ के नाम से मशहूर हैं इस गांव के लोग, गूगल ने दी अनोखी पहचान, जानिये क्या है वजह

माना जाता है कि रक्त दान महादान के बराबर होता है। इसकी तुलना अन्य किसी भी दान से अधिक होती है। चिकित्सकों के मुताबिक, 18 या इससे अधिक की उम्र का कोई भी शख्स अपना खून डोनेट कर सकता है। जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति 3-4 महीनों में बिना किसी परेशानी के 1 बार रक्तदान कर सकता है।

रक्तदाताओं की वजह से प्रसिद्ध है गांव

karnataka village akki aluru is hometown of blood donours

आज हम आपको भारत के एक ऐसे गांव के विषय में बताने जा रहे हैं जहां के लोगों को गूगल की तरफ से रक्तदाताओं का नगर का सम्मान मिला है। इस गांव का नाम है अक्की अलुरु। यह गांव कर्नाटक के हावेरी के हानागल तालुक में स्थित है। इस गांव की पहचान यहां के रक्तदाताओं की वजह से बनी हुई है।

पुलिस कॉन्सटेबल ने की थी शुरुआत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2015 में करीबसप्पा गोंडी नाम रके एक पुलिस हवलदार ने इस अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के तहत एक ऐसी सेना का निर्माण किया गया जो जरुरतमंदों को रक्त का दान करती है। इस सेना का नाम स्नेहमैत्री रक्तदानी बलगा रखा गया है। इस सेना में शामिल सभी वॉलंटियर्स को रक्त सैनिकों को नाम से जाना जाता है।

बताया जाता है कि ये रक्त सैनिक आस-पास के गांवों में जाकर लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं साथ ही जरुरतमंदों के लिए अपना खून भी दान देते हैं।

‘रक्त सैनिक हैं हम’-करीबसप्पा

रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2015 से लेकर अब तक तकरीबन 21,000 बार ये रक्त सैनिक खून दान कर चुके हैं। इस अनोखी सेना के सरदार करीबसप्पा बताते हैं कि, ‘हम ख़ुद को रक्त सैनिक कहते हैं। हमने अब तक लगभग 19 गांवों में रक्तदान शिविर लगाए हैं। मेरे फ़ोन में 5100 रक्तदाताओं के नाम और ब्लड ग्रुप सेव्ड हैं। जब भी ज़रूरत पड़ती है मैं डोनेशन की व्यवस्था कर देता हूं। मैंने अब तक 52 बार रक्तदान किया है।’

उन्होंने बताया कि इस सेना के पास NWRTC की बस है। इस बस को ‘रक्तदान रथ’ के नाम से जाना जाता है। यह बस ब्लड डोनर्स के विषय में लोगों को जानकारी देती है और रक्तदान के लिए गांव के लोगों को जागरुक करती है।

बच्चों की बचाते हैं जान

गौरतलब है, इलाके के कई गांवों में थैलेसेमिया नामक बीमारी से बच्चे जूझ रहे हैं। इस बीमारी में बच्चों का हेमोग्लोबिन नॉर्मल लेवल से भी काफ़ी कम हो जाता है। इसलिए करीबसप्पा के रक्त सैनिक 3-12 साल की उम्र के बच्चों के लिए रक्तदान करने जाते हैं।

About Editorial Team

Check Also

1800 करोंड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ यदाद्रि मंदिर, दरवाजों पर लगा है 125 किलो से अधिक सोना

साउथ इंडिया के मंदिरों की बात ही निराली होती है। यहां के लोगों में ईश्वर …

Leave a Reply

Your email address will not be published.