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दोनों हाथ गंवाने वाले व्यक्ति को डॉक्टर्स ने सर्जरी से दी नई जिंदगी

कहते हैं डॉक्टर्स धरती पर भगवान का ही रुप होते हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण हमने कोरोना काल में देखा था। जब पूरा देश कोरोना महामारी के कारण घरों में कैद था तब डॉक्टर्स पीपीई किट पहनकर अपनी जान की परवाह न करते हुए लोगों की सुरक्षा में लगे हुए थे। उनकी मदद कर रहे थे।

आज हम आपके साथ डॉक्टर्स की उदारता का एक और वाकिया साझा करने जा रहे हैं जिसमें चिकित्सकों ने वो कर दिखाया है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी।

करंट की चपेट में आने से गंवाए दोनों हाथ

बता दें, कर्नाटक के बेल्लारी स्थित राइस मिल में कार्यरत एक युवक ने आज से 10 साल पहले बिजली की चपेट में आने से अपने दोनों हाथ खो दिए थे। इस युवक का नाम बासवन्ना है। कई सालों तकर संघर्ष के बाद कोच्चि के एक अस्पताल में डॉक्टर्स ने अपने प्रयासों से इस शख्स की जिंदगी संवार दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2011 में बासवन्ना राइस मिल में काम कर रहा था। तभी उसने गलती से बिजली के तारों को छू लिया और उसे करंट लग गया। करंट इतना जोर था कि उसके दोनों हाथ मौके पर ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। उसके सहकर्मियों ने उसे बेल्लारी के एक अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टर्स ने उसका प्राथमिक इलाज करने के पश्चात उसे बेंगलुरु रेफर कर दिया। यहां बासवन्ना को अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े।

ब्रेन डेड व्यक्ति के हाथ

जानकारी के अनुसार, 2021 तक वह बिना हाथों के ही जिंदगी जी रहा था। साल 2016 में उसने अमृता अस्पताल में हैंड ट्रांसप्लांट के लिए रजिस्टर किया था। इसके बाद डॉक्टर्स ने बासवन्ना के एक ब्रेन डेड शख्स के हाथ लगाए। बताया जा रहा है कि 25 वर्षीय नेविस सजन मैथ्यू को 25 सितंबर 2021 को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। इसके बाद उसके माता-पिता ने बेटे के अंगों को दान करने का फैसला लिया।

बासवन्ना को मिले नए हाथ

डॉक्टर्स ने हैंड ट्रांसप्लांट की सहायता से बासवन्ना के हाथों की जगह पर नेविस के हाथ लगा दिए। 14 घंटों तक चली इस सर्जरी के बाद बासवन्ना की जिंदगी बदल गई। अब वह पहले की तरह सभी काम कर सकता है।

गौरतलब है, सेन्टर फ़ॉर प्लास्टिक ऐंड रिकन्स्ट्रक्टिव सर्जरी, अमृता अस्पताल के हेड, डॉ. मोहित शर्मा ने बासवन्ना की सर्जरी को लेकर बताया कि, ‘ट्रांसप्लांट फ़ोरआर्म के अपर थर्ड में किया गया। ये बहुत मुश्किल सर्जरी थी क्योंकि ऐसे ट्रांस्प्लांट में पाने वाले के प्राकृतिक हाथों का सिर्फ़ एक तिहाई ही उसके शरीर से जुड़ा होता है।’

वहीं, बासवन्ना ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि, ‘नए हाथ लगने के बाद मुझे ज़िन्दगी नई सी लगने लगी है। मैं आम ज़िन्दगी जी सकूंगा। मैं डॉक्टर्स का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं।’

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