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हत्या की सजा काट रहे इन आरोपियों ने जेल में खोली कैफे,अब कमा रहे हैं पैसे

देश में हत्या के आरोपियों को समाज अलग ही नजर से देखता है.और भारतीय संविधान के हिसाब से देश में हत्या करने के दोषियों के अलग अलग कानून बनाए गए है.बात दें की हत्या करने के जुर्म में किसी को 14 साल कार्यावास की सजा तो किसी को उम्रकैद की सजा सुनाई जाति है.ये हमारे देश के के कानून और प्रावधानों के अलग अलग सेक्शन से इस बात का फैसला सुनाया जात है की.दोषी को इस प्रकार की सजा सुनाई जाएगी.लेकिन उम्र कैद की सजा होने के बाद ये सोच लेते हैं की उनकी जिंदगी खत्म हो चुकी है.लें इस बात को मध्यप्रदेश के 4 हत्या के आरोपियों ने गलत साबित कर दिखाया है.

मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर सेंट्रल जेल में हत्या के चार दोषियों को जिंदगी जीने का मकसद मिल चुका है.और यह दोषी जेल में कैफे चला रहे हैं.और लोगों को यह कैफे बेहद पसंद आ रहा है.दरअसल लॉकोडाउन में जेल परिसर में कैदियों के रिश्तेदारों के लिए एक कैफे का उत्घाटन हुआ और ।और हत्या की सजा काट रहे चार आरोपी रंजीत दिलीप ,रवि ,और मन्नू इस कैफे में खाना बनाने का काम करते है. वहीं जेल की सुप्रीडेंटेंट में कहा की इस कैफे की शुरुआत 25000 हजार रुपया से हुई और यह जेल स्टाफ द्वारा इक्ट्ठे पैसों से किया गया.और इसके बाद राज्यसभा सांसद ने 8 लाख रूपया दान कर इस कैफे को कामयाब बनाया.

कैदियों ने सीखा


बता दें की लॉक डाउन के दौरान कैदियों ने यहां पर खाना बनाना सीख लिया और .करीब 15 से 20कैदियों ने खाना बनने में रुचि दिखाई.डिप्टी जैकी संतोष ने बताया की इन चारों ने मिठाई,चाय,समोसे, आलू पोहा,और मटर पनीर जैसी चीजें बनाना सीख ली

लॉकडॉउन ने बदल दी जिंदगी


लॉकडाउन ने बहुत सारी जिंदगी को बर्बाद कर दिया तो बहुत सी जिंदगियों के बीच उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया. कोविड बीमारी को देखते हुए सरकार ने इन चार कैदियों को पे रोल पर छोड़ दिया.ताकि बीमारी का प्रकोप न बढ़ सके ,और इन कैदियों को अपने जीवन में कुछ करने के मौका भी मिल गया.जेल प्रशासन ने कान्हा जेल कैफे के बाहर कान्हा जूस सेंटर और कान्हा चौपाटी की शुरुआत की और इसे आठ घंटे की शिफ्ट में चलाया जाता है. वहीं जेल के गार्ड भी इन अपनी निगरानी रखते हैं

पहनते हैं शेफ वाले कपड़े


दरअसल ये 8 घंटे की शिफ्ट का दौरान जेल के उजले और काले कपड़े नही बल्कि लाल और उजले शेफ वाले कपड़े पहनते हैं.और अब इनकी जूस की बिक्री भी अच्छी खासी हो रही है.पहले 25 से 30ग्लास ही जूस बिकते थे .लेकिन अब 250से 300 ग्लास जूस बिक जाते हैं.और अब जेल प्रशासन द्वार उन्हें पेस्ट्री केक और अन्य चीज़े सिखाई जा रही हैं.

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