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सरकारी नौकरी छोड़कर की अनार की खेती, हुआ 16 लाख का मुनाफा

इस बात से तो आप सब बखूबी वाकिफ होंगे कि जिस समाज में हम रहते हैं वहां सरकारी नौकरी का क्या महत्व है। लोग सरकारी नौकरी करने वाले व्यक्ति को किस नज़रिये से देखते हैं। कई बार हमारे माता-पिता भी हमें इस बात के लिए समझाते हैं कि मेहनत कर लो सरकारी नौकरी लग जाएगी ऐश करोगे। इस सबसे एक बात तो साफ है कि सरकारी नौकरी की दुनिया की नज़रों में वैल्यू तो बहुत है और इसे करने वालों को लोग पूजते हैं।

लेकिन तब क्या हो जब एक व्यक्ति सरकारी नौकरी त्यागकर खेती-किसानी करने लगे? ऐसे व्यक्ति को आप क्या कहेंगे? आज हम आपको ऐसे ही एक शख्स के विषय में बताने जा रहे हैं जिसने सरकारी नौकरी छोड़कर कृषि करने का फैसला लिया।

सरकारी नौकरी छोड़कर शुरु की खेती

इनका नाम कमलेश डोबरिया है। ये गुजरात के झालावाड़ के निवासी हैं। पिछले 20 सालों से ये खेती कर रहे हैं। इससे पहले ये सरकारी नौकरी करते थे जिसे इन्होंने त्याग दिया था।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमलेश बचपन से पढ़ाई मे तेज़ थे। साल 1991 में उनकी नौकरी जूनियर टेलीकॉम के पद पर लगी थी। इस दौरान वे शहर जाकर रहने लगे। जब वे गांव आते तो किसानों से बातचीत करते। धीरे-धीरे उनकी रुचि खेती-किसानी की ओर बढ़ने लगी।

साल 1998 में उन्होंने फैसला किया कि वे नौकरी की बजाए खेती ही करेंगे। इसलिए उन्होंने जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर के पद से इस्तीफा दे दिया।

20 बीघा जमीन से की शुरुआत

kamlesh left government job to start pomegranate horticulture

जानकारी के मुताबिक, कमलेश ने खेती करने का फैसला तो कर लिया लेकिन ना उनके पास जमीन और ना ही खेती करने का अनुभव। इसके लिए सबसे पहले उन्होंने कुछ पैसों की व्यवस्था करके 20 बीघा जमीन ली। शुरुआत में उन्होंने अन्य किसानों की तरह अरंडी और कपास की खेती की। इससे उन्हें ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ। पारंपरिक फसलों की खेती उन्हें उतना लाभ नहीं पहुंचा रही थी जितना वे चाहते थे।

इसलिए उन्होंने किसानों से मिलना प्रारंभ किया। इस बीच उनकी मुलाकात एक समझदार और प्रगतिशील किसान से हुई। उसने इन्हें कृषि से जुड़ी तमाम तरह की जानकारी दीं। धीरे-धीरे कमलेश की समझ विकसित हो गई और उन्हें खेती में नए-नए प्रयोगों करना शुरु किये।

ऑर्गनेनिक फार्मिंग करने का लिया फैसला

सबसे पहले उन्होंने केमिकल युक्त फर्टीलाइजर्स का उपयोग बंद किया। उन्होंने गाय के गोबर से बनी खाद का इस्तेमाल प्रारंभ किया। इससे उनके खेतों की मिट्टी की उर्वरता बढ़ने लगी और उनकी फसल अच्छी होने लगी।

2017 तक आते-आते उन्होंने अपने खेतों में सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन की व्यवस्था करवा ली। 2018 में उन्होंने पारंपरिक फसलों की जगह अनार की खेती करने का फैसला लिया। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले 2000 पौधे लगाए, फिर 1900 और फिर 700 पौधे लगाए। इन पेड़ों को बढ़ने में तकरीबन 3 साल का समय लगा। हालांकि, इनसे कमलेश को फसल अच्छी मिली।

पहली फसल में कमाया 16 लाख का मुनाफा

अब मुद्दा था कि इनको बेंचा कहां जाए? इसके लिए कमलेश ने मार्केटिंग की शुरुआत की। सबसे पहले उन्होंने लोकल मंडियों में अनार की सप्लाई शुरु की। इसके बाद उन्होंने अन्य शहरों में भी अपनी फसल की बिक्री शुरु की। इस सबके बीच उन्हें 16 लाख का मुनाफा हुआ। गौरतलब है, अब कमलेश अनार के अलावा अपनी ज़मीन पर अमरुद, कागज़ी नींबू और आंवले भी उगाते हैं।

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