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जीन्स की पॉकेट पर लगी छोटी बटनों का क्या है महत्व, जानिये

गुज़रे ज़माने की यदि हम बात करें तो जीन्स-टीशर्ट आदि कपड़े भारतीय बाज़ार में नहीं चलते थे। उस वक्त सिर्फ खादी के कुर्ते और सूत की धोती का फैशन था। समय के साथ कपड़ों में भी बदलाव होने लगा, लोग धोती-कुर्ते से पैंट-शर्ट पर आने लगे। इसके बाद समय आया जीन्स और टीशर्ट का। पश्चिमी देशों में पहना जाने वाला यह लिबाज़ भारतीय बाज़ारों में काफी ट्रेंड करने लगा। यही कारण रहा कि ज्यादातर भारतीय जीन्स के आदि हो गए। मार्केट अलग-अलग कंपनियों से पट गए और बल्क में जीन्स की ट्रेडिंग शुरु हो गई।

बहरहाल, आज हम आपको जीन्स से जुड़े एक ऐसे राज के विषय में बताने जा रहे हैं जिसके विषय में आपने शायद ही पहले कभी सुना होगा। आपने अक्सर देखा होगा कि जीन्स की जेब के ऊपर मेटल की गोल बटन लगी होती हैं। ये बटनें दोनों कोनों पर लगाई जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इन बटनों का क्या महत्व होता है? इन बटनों को जीन्स की पॉकेट पर क्यों लगाया जाता है?

साल 1829 में जब जीन्स का निर्माण हुआ था उस वक्त यह इतनी प्रचलन में नहीं थी। लोगों को जीन्स के विषय में धीरे-धीरे ही पता चल रहा था। ऐसे में कोयले की खदानों में काम करने वाले मजदूरों की शिकायत थी काम करते-करते उनके पैंट की जेब फट जाती है जिसकी वजह से वे कुछ भी सामान सुरक्षित नहीं रख पाते हैं।

जैकब ने जीन्स की जेब पर लगाई बटनें

लोगों की इसी समस्या के मद्देनज़र जैकब नाम के एक टेलर ने जीन्स के साथ अनोखा आविष्कार किया। उस व्यक्ति ने जीन्स की पॉकेट पर दोनों तरफ बटनों लगा दी। इससे जीन्स की जेब और अधिक मजबूत हो गई। धीरे-धीरे उसका यह आविष्कार प्रचलन में आ गया और कंपनियों ने इसे अपनाना शुरु कर दिया। कुछ समय बाद जब लोगों को पता चला कि य़ह आविष्कार जैकब ने किया है तो लोगों ने उसे सलाह दी कि वह इसका पेटेंट क्यों नहीं करा लेता? हालांकि, इस काम के लिए काफी पैसे खर्च होने थे जो कि उसके पास थे नहीं।

इसलिए उसने एक पत्र लिखकर उस वक्स सबसे बड़ी जीन्स निर्माता कंपनी लिवाइस स्ट्रॉस को अपने इस आविष्कार के विषय में सूचित कराया। इसके बाद कंपनी ने न सिर्फ उसे इस काम के लिए पहचान दी बल्कि जैकब को लिवाइस में प्रोडक्शन मैनेजर के तौर पर नौकरी भी दी गई थी।

जीन्स की पॉकेट में छोटी पॉकेट का महत्व

खैर, क्या आप जानते हैं कि जीन्स की पॉकेट में एक और छोटी पॉकेट बनाने का महत्व क्या है? दरअसल, जीन्स का निर्माण मजदूर और लेबर क्लास वर्ग के लिए किया गया था। उनकी शिकायत थी कि खदानों में काम करते वक्त उनके कपड़े जल्दी फट जाते हैं इसलिए उन्हें एक ऐसे परिधान की आवश्यकता थी जो 6 महीने से अधिक चल सके। इसी उद्देश्य से जीन्स का निर्माण किया गया था। उस ज़माने में हाथ घड़ी की जगह पॉकेट वॉच काफी प्रचलन में थी। खदानों आदि में काम करने वाले मजदूर पॉकेट वॉच में देखकर समय का पता लगाते थे। इसलिए जीन्स की जेब में छोटी पॉकेट का निर्माण किया गया था। इन जेबों में मजदूर अपनी पॉकेट वॉच रखते थे तो काफी सुरक्षित रहती थी।

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