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भारत का वो मंदिर जहां ‘पट’ बंद करने से पहले पूछी जाती है ये बात…

भारत को आस्था का केंद्र माना जाता है। यहां का हर नागरिक अपने कार्य को ईश्वर से जोड़कर करता है। य सब उसके संस्कारों में विद्यमान होता है।

इस देश में पूर्वजों द्वारा बनाए गई परंपराओं का सख्ती से पालन किया जाता है। माना जाता है कि इनके पालन से ईश्वर की कृपा इंसानों पर सदैव बनी रहती है। इन्हीं परंपराओं में से एक परंपरा है भूखे को खाना खिलाने की।

प्रख्यात कवि कबीरदास ने कहा है कि
‘’साईं इतना दीजिये, जामें कुटुंब समाए।
मैं भी भूंखा ना रहूं, साधु ना भूंखा जाए।।‘’
इसका अर्थ है कि हे प्रभु इतना दे दीजिये कि मैं अपने परिवार का पेट पाल सकूं इसके साथ-साथ मेरे दर पर आने वाले साधू या किसी भी व्यक्ति को भूंखा ना जाने दूं।

आज भी भारत में कई ऐसे स्थान हैं जहां इस परंपरा का पालन किया जाता है। आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के विषय में बताने जा रहे हैं जहां गरीब, सहाय लोगों की सहायता के लिए सेवादार हर समय तैनात रहते हैं।

मंदिर से निकलकर आवाज़ लगाते हैं सेवादार

इस मंदिर का नाम वाइकॉम महादेव मंदिर है। यह केरल के कोट्टयम जिले में स्थित है। इस मंदिर के पट बंद होने से पहले सेवादार बाहर निकलकर आवाज़ लगाते हैं कि क्या कोई है, जो रात के खाने के लिए भूखा है। जवाब में यदि कोई व्यक्ति हां कहता है, तो उसके लिए तुरंत भोजन का इंतजाम किया जाता है। इसके बाद ही मंदिर का मुख्य द्वार बंद किया जाता है। यह काम रोज किया जाता है।

इस मंदिर के भक्तों की कोशिश रहती है कि मंदिर के गेट से कोई भी भूखा न लौटे। यही कारण है कि देर शाम तक यहां गरीबों का तांता लगा रहता है।

सदियों से चली आ रही परंपरा

जानकारी के मुताबिक, मंदिर में रोज़ 2000 लोगों का खाना तैयार किया जाता है। बताया जाता है कि यह बहुत पुरानी परंपार है जिसका पालन सदियों से किया जा रहा है।
गौरतलब है, कोरोना काल के दौरान भी मंदिर के सेवादारों ने सेवा का भाव नहीं छोड़ा था। उस वक्त भी जरुरतमंदों को उनके घर तक भोजन पहुंचाया गया था।

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