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भारत का वो मंदिर जिसे भारतीयों ने नहीं बल्कि अंग्रेजों ने बनवाया था, जानिये

अंग्रेजों ने हमारे देश भारत पर न जाने कितने वर्षों तक राज किया। इस दौरान उन्होंने भारतवासियों पर न जाने कितने जुल्म किए। इस सबके बावजूद भी जब उनका मन नहीं भरा तो उन्होंने सोने की चिड़िया कहे जाने वाले इस देश को लूट-लूटकर खोखला कर दिया। इतने जुल्म और अत्याचार के बावजूद वे हमारे नाम को मिटाने में नाकाम रहे थे।

अंग्रेज ने करवाया था मंदिर का निर्माण

अंग्रेजों के बारे में कहा जाता है कि वे मंदिर और मस्जिद को दूषित मानते थे लेकिन भारत में एक मंदिर ऐसा भी है जिसका निर्माण अंग्रेजों के द्वारा ही करवाया गया था। यह मंदिर आगरा के मालवा में स्थित है। इसका नाम बैजनाथ महादेव मंदिर है। इसका निर्माण एक अंग्रेज पति-पत्नी के द्वारा करवाया गया था।

आगरा में बना भोलेनाथ का मंदिर

यह मंदिर आगरा के सुसनेर रोड उज्जैन-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग 27 पर स्थित है। यह मंदिर बाणगंगा नदी के तट के किनारे बना हुआ है। मंदिर का निर्माण 1528 से 1536 तक चला था। बाद में इसको अंग्रेजों के द्वारा तोड़ दिया गया था। हालांकि, एक अंग्रेज दंपति ने 1883 में मंदिर का पुनर्निमाण करवाया था। अब सवाल यह उठता है कि अंग्रेज ने इस मंदिर को क्यों बनवाया था जबकि अंग्रेज तो ईसाई धर्म को मानते थे?

भोलेनाथ ने की थी रक्षा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक अंग्रेज अफगानिस्तान से जंग के लिए गया हुआ था। ऐसे में उसकी पत्नी ने पुजारियों से इसके विषय में बताया और कहा कि कुछ ऐसा कीजिये कि मेरे पति जिंदा मेरे पास वापिस आ जाए। यह सब सुनकर एक पुजारी ने उसे 11 दिन तक ओम नम: शिवाय का जाप करने को कहा था। उस औरत ने महादेव की सच्चे मन से प्रार्थना की थी। उसके कुछ दिन बाद उसके पति का खत आया था जिसमें लिखा था कि मुझ पर कुछ पठानों ने अचानक हमला कर दिया जिसके बाद मुझे लगने लगा कि मैं नही बचूंगा और तभी मेरे सामने एक लंबी जटाओं वाला एक बाबा आया जिसने शेर की खाल पहन रखी थी। उसके हाथ में त्रिशूल था वह मेरे सामने खड़ा हो गया और उसने अफगानों को मार गिराया जिसकी वजह से मेरी जान बच सकी।

पत्र में आगे लिखा था कि, बाबा ने कहा कि तुम्हें डरने की जरूरत नही हैं। मैं तुम्हें बचाने आया हूं क्योंकि तुम्हारी पत्नी सच्चे मन से मेरी प्रर्थना कर रही है। कहा जाता है कि इसके बाद अंग्रेज ने मंदिर के लिए 15 हज़ार रुपये का दान किया था। इन रुपयों से मंदिर का दोबारा निर्माण करवाया गया था। गौरतलब है, आज भी मंदिर के बाहर लगे पत्थर पर यह जानकारी लिखी हुई है। बताया जाता है कि पति पत्नी आजीवन महादेव के भक्त रहे थे।

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