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बेमिसाल! लाइलाइज ब्रेस्ट कैंसर की वैक्सीन तैयार कर इस लड़की ने भारत का नाम किया रौशन

समाज के कुछ लोग आज भी बेटियों को घरों की चार दीवारी तक कैद रखने के सपने देखते हैं। उनका मानना होता है कि लड़कियां सिर्फ घरों में ही अच्छी लगती हैं बाहर नहीं। हालांकि, इस देश में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी बच्चियों के भविष्य को संवारने के लिए उन्हें विदेश तक भेजते हैं।

आज हम आपको ऐसी ही एक महिला चिकित्सक के विषय में बताने जा रहे हैं जिसने अपने कारनामे से ना सिर्फ अपने माता-पिता का नाम रौशन किया है बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित महसूस करवाया है।

माता-पिता और बेटी सभी डॉक्टर हैं

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बता दें, इस महिला का नाम डॉ. छवि जैन है। ये राजस्थान के अजमेर के वैशाली नगर स्थित सागर विहार कॉलोनी की निवासी हैं। इनके पिता डॉ. संजीव जैन शहर के जेएलएन अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। वहीं, इनकी माता डॉ. नीना जैन जेएलएन अस्पताल में एनीस्थीसिया विभाग में सीनियर प्रोफेसर और पूर्व एचओडी हैं।

डॉ. छवि जैन ने लाइलाज ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर की वैक्सीन तैयार कर ली है। अब इस वैक्सीन का ट्रायल शुरु हो चुका है।

भारत की बेटी ने तैयार किया लाइलाज बीमारी का टीका

बता दें, अमेरिका में जिस टीम ने इस लाइलाज बीमारी की वैक्सीन को तैयार किया है छवि उस टीम का हिस्सा थीं। अमेरिका के लर्निंग इंस्टीट्यूट क्लीवलैंड क्लीनिक में साइंटिस्ट छवि अमेरिकन कैंसर सोसायटी की फीमेल रिसर्च एंबेसडर भी हैं।

पीड़ित महिलाओं पर ट्रॉयल की तैयारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ, छवि की टीम ने जिस वैक्सीन को तैयार किया है उसका ट्रॉयल सबसे पहले जानवरों पर किया गया था। यह प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा। अब इसका क्लीनिकल ट्रॉयल महिलाओं पर किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इस बीमारी से जूझ रहीं 18-24 साल की महिलाओं को दो हफ्ते के अंतराल में तीन डोज इस वैक्सीन की दी जाएंगी।

अजमेर से विदेश तक की पढ़ाई

मालूम हो, छवि ने अपनी शुरुआती शिक्षा अजमेर स्थित मयूर स्कूल से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने पुणे के इंस्टीट्यूट ऑफ बायो इन्फोर्मेटिक्स एंड बायो टेक्नोलॉजी से एमटेक किया। बाद में वे स्विटजरलैंड गईं। यहां की स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी यूनिवर्सिटी से उन्होंने अपना पीएचडी खत्म किया।

रिसर्च टीम में हुईं शामिल

खबरों के मुताबिक, अमेरिका स्थित लर्नर रिसर्च इंस्टीट्यूट में साल 2018 से 2021 तक काम किया था। यहीं उनकी मुलाकात डॉ. थामस बड और डॉ. विनसेंट टूही से हुई। दोनों ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें इस रिसर्च बेस्ड इस वैक्सीन के ट्रायल में शामिल कर लिया।

पढ़ाई में नहीं लगता था मन

गौरतलब है, बेटी की इस उपलब्धि पर उनके माता-पिता काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में छवि को ज्यादा देर तक पढ़ते हुए नहीं देखते थे। वे हमेशा खेलती-कूदती रहती थीं। लेकिन जब उनसे सवाल किये जाते थे तो वे जवाब सही देती थीं। इससे सभी लोग हैरान थे। छवि का मां डॉ. नीना बताती हैं कि उनकी बेटी की लर्निंग कैपेसिटी काफी स्ट्रॉन्ग है। वे जो पढ़ती हैं, उन्हें तुरंत ही याद हो जाता है। यही कारण है कि उन्होंने इतना बड़ा मुकाम हांसिल कर लिया।

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