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शिक्षक की सार्थक पहल! छात्रा के लिए इकट्ठा किए 1 लाख रुपये

कहा जाता है कि एक शिक्षक समाज का भविष्य तय करता है। जैसे एक कुम्हार मिट्टी के बर्तन को धीरे-धीरे तराशता है ठीक वैसे ही एक शिक्षक छात्रों को बचपन से तराशता है जिसके फलस्वरुप बच्चा आगे चलकर अच्छा इंसान बनता है और नेकी के रास्ते पर चलकर समाज के हित में कार्य करता है।

आज हम आपको ऐसे ही एक शिक्षक के विषय में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपने प्रयासों से एक जरुरतमंद छात्रा की तकलीफ को दूर कर दिया। बता दें, तमिलनाडु के लालगुडी तालुक के आलमबाडी के एक शिक्षक ने मार्शिया जॉन नाम छात्रा के लिए 1 लाख रुपये इकट्ठे किए और उसकी मदद की।

2 साल की उम्र में चली गई सुनने की शक्ति

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्शिया जब 2 साल की थी तब ही से उनकी सुनने की शक्ति कमजोर हो गई थी। बाद में उसे दौड़े पड़ने लगे जिसकी वजह से एक दिन उसकी सुनने की शक्ति चली गई। अब उसकी मां दिव्या बच्ची के इलाज के लिए पैसे इकट्ठा करने में जुटी हुई थी। हालांकि, इतनी बड़ी रकम जुटाने में वे असमर्थ थी।

आर्थिक स्थिति से जूझ रहा परिवार

अपनी आर्थिक स्थिति के विषय में बात करते हुए दिव्या ने कहा कि, ‘मैंने दिव्यांग की ज़िन्दगी जी है और मुझे सारी परेशानियों के बारे में पता है। मैं नहीं चाहती मेरी बच्ची भी वही परेशानियां झेले। मेरे पति एक टू-व्हिलर की दुकान में काम करते हैं। गुज़र-बसर करना मुश्किल है। हमने बैंक से लोन लेकर गुज़ारा किया लेकिन अब लोन लेन के लिए भी पैसे नहीं हैं।’

जानकारी के अनुसार, शारीरिक असमर्थता के बावजूद मार्शिया आगे बढ़ती रही। उसने कान की मशीन की मदद से सुनना शुरु कर दिया था। हालांकि, कोरोना काल के दौरान उसकी कान की मशीन खराब हो गई। अब उसकी मां के पास उसको ठीक कराने के लिए पैसे नहीं थे। डॉक्टर्स ने बताया कि इस मशीन को ठीक कराने में लगभग 60 हज़ार से 1 लाख तक का खर्च आता। इसपर दिव्या ने कई लोगों से मदद मांगी लेकिन उसकी सहायता किसी ने भी नहीं की।

सतीश कुमार ने की 1 लाख की मदद

इस दौरान मार्शिया की मां दिव्या की मुलाकात सतीश कुमार से हुई। सतीश लालगुड़ी के ही सरकारी स्कूल में अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें जब दिव्या ने अपनी बच्ची की परेशानी के विषय में बताया तो उन्होंने झट से उस बच्ची की सहायता के लिए हां कर दी। सतीश ने दिव्या को आश्वासन दिया कि 1 लाख रुपये इकट्ठा करने के लिए वे उसकी मदद करेंगे।

सतीश ने इसके विषय में बात करते हुए कहा, ‘मैं चाहता हूं कि बच्ची की ज़िन्दगी बेहतर हो और वो अच्छे से पढ़ाई करे। बोलने में उसने जितनी उन्नति की थी वो सब मशीन खराब होने की वजह से नष्ट गई। वो दो साल से मशीन नहीं पहन रही थी क्योंकि मशीन खराब थी।’

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