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रुस की पहली महिला प्रधानमंत्री जिससे खौफ खाता था रुस, संकट के समय में जनता कर रही याद

पिछले कुछ दिनों से दुनिया में हालात तीसरे विश्व युद्ध का संकेत दे रहे हैं। रुस और यूक्रेन के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है। रुसी प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर हमला करने के सेना को निर्देश जारी कर दिए हैं जिसके बाद से स्थिति और अधिक बद्तर हो गई है।

इस कठिन समय में यूक्रेन की जनता देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री को याद कर रही है। लोगों का मानना है कि अगर देश का नेतृत्व यह महिला को कर रही होती तो रुस की मजाल नहीं थी कि यूक्रेन की तरफ आंख उठाकर देख जाए।

देश की पहली महिला पीएम

इस महिला का नाम यूलिया तेमोसेंकोवा। इनका जन्म 27 नवंबर 1960 को निप्रॉपेट्रोस, यूक्रेनी एसएसआर, सोवियत संघ में हुआ था। ये देश की सफल कारोबारियों में से एक हैं साथ ही यूक्रेन की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूलिया ने अपने कार्यकाल के दौरान रुस को हमेशा तल्ख लहज़े में जवाब दिया। उनके आगे रुस की एक न चली। उन्होंने रुस को एक इंच ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं करने दिया।

बता दें, गैस क्वीन के नाम से मशहूर यूलिया तेमोसेंकोवा यूक्रेन की बड़ी कारोबारी हैं। साल 2005 में उन्होंने पहली बार यूक्रेन के प्रधानमंत्री के रुप में शपथ ली। इसके बाद उन्होंने साल 2007 में भी प्रधानमंत्री का पद हांसिल किया।

ऑरेंड रिवोल्यूशन की प्रणेता

जानकारी के अनुसार, यूलिया को ऑरेंज रिवोल्यूशन का प्रणेता भी कहा जाता है। बताया जाता है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर यूश्नकोव साल 2004 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद रुस के समर्थक के रुप में काम कर रहे थे। उनके इस कृत्य का विरोध करते हुए यूलिया की पार्टी ने खुलकर उनका विरोध किया था। इस दौरान देश की जनता ने भी उनका साथ दिया था। जिसका नतीजा यह निकला कि विक्टर को देश छोड़कर भागना पड़ गया था।

हालांकि, 2010 में देश में एक बार फिर राष्ट्रखपति चुनाव हुए जिसमें यूलिया को विक्टजर यूश्नकोव से मात्र 3.3% वोट से हार का सामना करना पड़ा। एक बार फिर राष्ट्रपति के पद पर काबिज़ होने के बाद विक्टर ने यूलिया के खिलाफ षड़यंत्र रचकर उन्हें जेल भेज दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2011 से 2014 तक वे जेल में रहीं। इस दौरान उन्हें शारीरिक और मानसिक रुप से प्रताड़ित किया गया। हालांकि, उन्होंने विक्टर के जुर्म के आगे हार नहीं मानी और वे डटी रहीं।

नहीं बन सकीं राष्ट्रपति

जेल से लौटने के बाद साल 2019 में यूलिया ने राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लिया लेकिन इस बार उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया और उन्हें 13.40% वोट ही हासिल हुए। हालांकि, 2019 में उन्होंने संसद में विपक्ष का नेतृत्व किया।

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