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केले की डंठल से इस लड़की शुरु किया व्यापार, आज दे रही सैकड़ों महिलाओं को नौकरी, जानिये कैसे

आजादी के 75 साल बाद भी लोग महिलाओं को घर कामों में उलझाने के पक्ष में बात करते हैं। उनका मानना होता है कि महिलाएं घर कामों के लिए बनी हैं। आज भी इस देश में कई ऐसे गांव मौजूद हैं जहां महिलाओं को उनके मूल अधिकारों से वंचित रखा जाता है। इनमें शिक्षा से लेकर घर से निकलने तक सभी चीजों पर पाबंदी होती है। लेकिन जब कोई महिला इन बेड़ियों को तोड़कर बाहर निकलती है तो वह इतिहास रचकर ही वापिस लौटती है। इस बात का प्रबल उदाहरण 25 साल की वैशाली प्रिया हैं। उन्होंने अपने साथ-साथ अपने गांव की कई महिलाओं का जीवन संवार दिया है।

बिहार के हाजीपुर की रहने वाली वैशाली बचपन से ही पढ़ाई में तेज़ थीं। वे चाहती थीं कि वे बड़ी होकर एक उद्यमी बनें और अपना खुद का व्यापार करें। हालांकि, गांव में यह सब संभव नहीं था। इसलिए उन्हें शहर का रुख किया और वे दिल्ली आ गई। यहां उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और कुछ वर्षों तक नौकरी भी की। लेकिन उनका दिल नहीं भरा। उन्होंने सोंचा कि उनके गांव की महिलाएं आज भी चूल्हे-चौके आदि तक ही सीमित रहती हैं ऐसे में उनके लिए कुछ करना चाहिए। वैशाली कुछ सालों बाद हाजीपुर वापिस लौट आईं। यहां उन्होंने अपने एक नए व्यापार की शुरुआत की जिसमें उन्होंने महिलाओं का साथ लिया।
दरअसल, बिहार का हाजीपुर केले की खेती के लिए काफी प्रसिद्ध है। माना जाता है कि इस क्षेत्र से आसपास के कई राज्यों में केले भेजे जाते हैं।

शुरु किया नया प्रोजेक्ट

वैशाली ने इसी बात का फायदा उठाकर केले के छिलकों से फाइबर निकालने का व्यापार शुरु किया। उन्होंने इसके लिए “Surmayi Banana Extraction Project” नामक कंपनी की शुरुआत की। इसके ज़रिये वे आर्गेनिक और नेचुरल प्रोडक्ट्स से फाइबर निकालने की स्किल को प्रमोट कर रही हैं।

बता दें, वैशाली ने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 30 महिलाओं के साथ की थी। धीरे-धीरे उनका यह प्रोजेक्ट सफल होने लगा जिसके बाद गांव की 90 प्रतिशत महिलाएं इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बन गईं। अब वैशाली के इस काम में लोकल कृषि विज्ञान केंद्र भी उनकी मदद करता है।

महिलाओं को किया जाता है प्रशिक्षित

वैशाली ने अपने इस काम के विषय में बात करते हुए कहा कि, “इन महिलाओं और अन्य सदस्यों को केले के पौधों से निकाले गए अंतिम कच्चे माल से प्रॉडक्ट को बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। वास्तव में, केले के फ़ाइबर का उपयोग विभिन्न वज़न और मोटाई के साथ विभिन्न वस्त्रों को बनाने के लिए किया जा सकता है। केले के तने के किस हिस्से के आधार पर फाइबर को निकाला जाता है. केले के फाइबर के लगभग 5-6 किलोग्राम होते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि, “बचपन से ही मुझे पता था कि मेरा छोटा शहर हाजीपुर केले के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है और केले की फसल कटने के बाद बड़ी मात्रा में कचरे का उत्पादन भी होता है।”

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