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बेटी की शादी में पिता ने दहेज में दी साहित्य की पुस्तकें, जानिये वजह

कहते हैं जिस घर की बेटी पढ़ती है उस घर में सुख-समृद्धि निरंतर बरकरार रहती है। बेटियों के पढ़ने से आने वाली नस्लों का भविष्य उज्जवल होता है। हालांकि, आज भी समाज में बेटियों को चूल्हे-चौके तक सीमित रखने का रिवाज़ अपनाया जाता है। लोगों की धारणा होती है कि लड़कियों को पढ़ा-लिखाकर पैसा खर्च करने से क्या होगा इन्हें तो दूसरे के घर जाना होता है। इसलिए पैसे को शिक्षा पर खर्च करने की बजाए लोग इनकी शादी में दिए जाने वाले दहेज के लिए जोड़ते हैं।

समाज में इस तरह की कई कुरीतियां आज भी विद्यमान हैं जिन पर अंकुश लगाने के लिए कानून तो बनाए गए हैं लेकिन उनका पालन कोई नहीं करता। हालांकि, समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जो इन कुरितियों के खिलाफ काम कर रहा है। वह वर्ग है शिक्षितों का। बेटियों के हित में लड़ाई लड़ने के लिए शिक्षित होना बहुत आवश्यक है क्योंकि शिक्षा ही वो हथियार है जो समाज को इस दलदल से निकाल सकती है।

बहरहाल, आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के विषय में बताने जा रहे हैं जिसने अपनी बेटी की शादी में दहेज के रुप में ऐसी चीज़े भेंट की हैं जिसे देखकर हर शख्स की आंखें फटी की फटी रह गईं। बता दें, तमिलनाडु के प्रसिद्ध कवि थंगम मूर्ति ने अपनी बेटी की शादी में विशिष्ट कवियों की रचनाओं को दहेज के रुप में भेंट करके सार्थक पहल की शुरुआत की है।

शादी में भेंट की किताबें

तमिलनाडु के पुदुकोट्टई में 20 फरवरी को अपनी बेटी की शादी के दौरान थंगम मूर्ति ने तमिल साहित्य के मशहूर रचनाकारों- तिरुवल्लुवर, कम्पर, भरतियार, कन्नधसन, भारतीदसन, वाली, पट्टुक्कोट्टई कल्याणसुंदरम आदि की किताबें भेंट कीं। इन किताबों को 9 बैलगाड़ियों पर दहेज की तरह सजाया गया था।

हर तरफ हो रही तारीफ

वर-वधू के नए जीवन की शुरुआत से पहले थंगम मूर्ति ने उन्हें किताबें भेंटकरके सभी को चौंका दिया। गौरतलब, तमिल कवि की इस पहल की चर्चा अब चारों तरफ हो रही है। लोग उनके द्वारा शुरु की गई इस पहल की सराहना कर रहे हैं।

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