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Italy के संविधान में शामिल हुआ ‘पर्यावरण संरक्षण’ का मुद्दा, दुनिया के लिए बना प्रेरणा

आधुनिकता के इस दौर में हम प्रकृति को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है माउंट एवरेस्ट पर जो बर्फ पिछले 2000 सालों में जमकर तैयार हुई थी वह महज़ 25 सालों में पिघल गई।

पर्यावरण को हो रहा नुकसान

आज हम यह बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इंसान अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। आज बढ़ती आबादी प्राकृतिक संसाधनों के लिए विनाशकारी साबित हो रही है। प्रकृति से मिलने वाले संसाधन जैसे कि पेट्रोल, तेल, डीजल, कोयला आदि की मात्रा दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है जिसका खामियाज़ा हमारे साथ-साथ आने वाली नस्लों को भी उठाना पड़ेगा। पेड़ों की निरंतर कटाई, नदी-तालाबों का दिन-प्रतिदिन सूखना, जल स्तर में कमी आदि किसी बड़ी समस्या की तरफ इशारा कर रहे हैं। इन सबसे हो रहा जलवायु परिवर्तन पर्यावरण के लिए घातक साबित हो रहा है। कई देशों में सरकारों ने प्रकृति की सुरक्षा को लेकर कानून भी बनाए हैं, हालांकि उनका कितना पालन हो रहा है यह किसी को बताने की और समझाने की जरुरत नहीं है।

सरकार ने उठाया महत्वपूर्ण कदम

बहरहाल, आज हम आपको इटली के विषय में बताने जा रहे हैं जिसने पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर बहुत ही जरुरतमंद कदम उठाया है। उसका यह फैसला अन्य देशों के लिए नज़ीर बन गया है। बता दें, इटली में बीते मंगलवार को पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर अहम फैसला लिया है। यहां की सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को इस देश के संविधान में शामिल कर लिया है जिसके बाद प्रकृति की सुरक्षा कानून जिम्मेदारी बन गई है।

जानकारी के मुताबिक, अब पर्यावरण, बायोडाइवर्सिटी और इकोसिस्टम को हो रहे नुकसान को लेकर यहां की सरकार ने यह फैसला लिया है। इसके तहत अब किसी भी तरह की प्राइवेट इकोनॉमिक पहल से पर्यावरण या यहां लोगों के स्वास्थ्य को हानि नहीं पहुंचनी चाहिए।

यब बिल पर्यावरण के लिए उपयोगी

मालूम हो, इकॉलॉजिकल ट्रांज़िशन मंत्री रॉबर्टो सिंगोलानी ने इटली के लिए पर्यावरण संरक्षण बिल को काफी महत्वपूर्ण एवं उपयोगी बताया है। उनका कहना है कि इससे हम पर्यावरण की सुरक्षा में एक सार्थक कदम बढ़ाएंगे। गौरतलब है, इस कानून के पारित होने के बाद अब इसका आर्थिक क्षेत्र पर कितना असर पड़ेगा यह देखना काफी दिलचस्प होगा।

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