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इस ट्रांसजेंडर ने लिया पीएचडी में दाखिला, और ऐसा करने वाली बनी देश की पहली ट्रांसजेंडर

हमारा देश आज ताकि कर रहा है हम आपको बता दें कि जहां पहले ट्रांसजेंडर लोगों को कोई महत्व नहीं दिया जाता था. आजकल कोई ट्रांसजेंडर पढ़ रहे हैं और तरक्की कर रहे हैं . सामाजिक वाले नजरिए से जलता है लेकिन वह कहते हैं कि अगर आप लोग कुछ करने की काबिलियत है तो आप समाज के ताने नहीं सुनते हैं बल्कि अपने लक्ष्य का पीछा करते हुए मंजिल हासिल करते हैं. ट्रांसजेंडर को भले ही समाज ने नकार दिया हो लेकिन आज वह अपने दम पर कुछ अलग करने की कोशिश कर रहे हैं. और आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे ट्रांसजेंडर की जिन्होंने किस डे के पढ़ाई में दाखिला लिया और ऐसा करने वाली वह देश की पहली ट्रांसजेंडर बन गई है.

कर्नाटका से कर चुकी हैं PhD

हम बात कर रहे हैं दीपा बुद्ध की जिन्होंने इतिहास रच दिया है और 32 साल की उम्र में ही कर्नाटका के यूनिवर्सिटी में पीएचडी में दाखिला लिया है और ऐसा करने वाली भारत की पहली ट्रांसजेंडर बन गई है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो उन्होंने पहले यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर से अपने ही समुदाय पर ही प्रोफ़ेसर जे सोमशेखकर के अंडर शोध कर रही हैं. दीपा के शोध का विषय पढ़ रही हैं. बता दें कि इससे पहले देश के अन्य ट्रांसजेंडरपोर्न पीएचडी में दाखिला लिया है लेकिन उन्होंने अपने आप को मेल या फीमेल बताया था लेकिन दीप बुद्धू ने खुद को ट्रांजेंडर बताकर पीएचडी में दाखिला लिया.

परिवार वालों ने छोड़ा साथ

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दीप सिद्धू कि जिंदगी काफी संघर्ष भरी रहे और जब वह कक्षा सातवीं में थे तो उन्हें अपने ट्रांसजेंडर होने का एहसास हुआ बता दें कि दीप सिद्धू के पिता एक दिहाड़ी मजदूर हैं तो तो वहीं उनकी मां गृहणी हैं. दीपा ने आगे बताते हुए कहा कि जब मैं 12 साल की थी तब मुझे परिवार वाले बहुत प्यार देते थे लेकिन मेरे परिवार वाले को जब यह पता चला कि मैं ट्रांसजेंडर हूं तो उन्होंने मुझे दूध कार दिया और मैं आज 12 साल की उम्र से अपने घर वालों से अलग रह रही हूं जब मेरे घर वालों ने निकाला तो मैंने अपने समाज से जुड़ने का निर्णय लिया था.

समाज ने कसे तंज

दीप सिद्धू ने आगे बताया जब वह पढ़ाई कर रही थी तब समाज में उनके ऊपर खूब तंज कसे उन्होंने बताया कि साल 2015 में उन्होंने डिग्री करने के लिए कॉलेज में दाखिला लिया तो समाज के ताने सुन सुनकर वह पक चुकी थी और उन्हें बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी. साल 2018 में उन्होंने अंबेडकर यूनिवर्सिटी से मास्टर किया. और समाज के ताने ना सुनते हुए उन्होंने जीवन में आगे बढ़ने का निर्णय लिया आज दीपू बहुत सारे लोगों के लिए प्रेरणादायक हैं.

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