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भारत में बढ़े भूलने की बीमारी से ग्रसित मरीज, 2050 तक अधिक बढ़ेगी संख्या

कई बार आपने देखा होगा कि लोग चीजों को रखकर भूल जाते हैं और फिर याद करने पर उन्हें याद नहीं आता है। हम अक्सर इन चीजों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं जबकि य़े किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं।

जी हां, मेडिकल की भाषा में भूलने की बीमारी को डिमेंशिया के नाम से जाना जाता है। इस बीमारी में इंसान धीरे-धीरे सबकुच भूलता जाता है। कई बार लोगों की इसकी वजह से मृत्यु भी हो जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बीमारी से ग्रसित इंसान के दिमाग में अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनने प्रारंभ हो जाते हैं जिनकी वजह से कई बार व्यक्ति का दिमाग काम करना बंद कर देता है जिसका नतीजा ये रहता है कि मरीज की मृत्यु हो जाती है।

भारत में बढ़ेंगे मरीज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2050 तक भारत में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या में 197% की वृद्धि होगी। इससे देश में करीब 1.14 करोड़ लोग इस बीमारी से जूझते हुए मिलेंगे। ऐसा सिर्फ अपने देश में ही नहीं बल्कि यही हाल चीन, श्रीलंका जैसे देशों में भी होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन में ये संख्या 197%, मालवदीव में 554%, श्रीलंका में 224%, बांग्लादेश में 254%, भूटान में 351%, नेपाल में 210%, पाकिस्तान में 261% की बढ़ोत्तरी दर्ज की जाएगी।

डब्लूएचओ ने जताई चिंता

मालूम हो, डिमेंशिया काफी गंभीर बीमारियों में से एक है। इसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चेतावनी जाहिर की है। डब्ल्यूएचओ ने इस बीमारी को मृत्यु के मामले में 7वां प्रमुख कारण माना है। इस रोग में इंसान की याद्दाश्त, सोचन- समझने की क्षमता प्रभावित होती है।

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