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टॉप करने के बावजूद नहीं मिली नौकरी, ठोंका मुकदमा, 30 साल बाद मिला 80 लाख का मुआवजा

देश में सरकारी नौकरी को लेकर हर किसी के मन में लालच रहता है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी सरकारी नौकरी लग जाए जिससे वह आसानी से अपना जीवन-यापन कर सके। हालांकि, कई बार ऐसे मामले हमारे सामने आते हैं जिनमें व्यक्ति को नौकरी के लिए चुन तो लिया जाता है लेकिन भ्रष्टाचार के कारण उसे उस नौकरी से हटा भी दिया जाता है और उसकी जगह किसी अन्य व्यक्ति को उस पोस्ट पर बैठा दिया जाता है।

शिक्षक पद के लिए किया था आवेदन

dehradun rejected teacher got appointment and 80 lakh rupees compensation

ऐसा ही एक मामला अब सामने आया है। दरअसल, साल 1989 में देहरादून के सरकारी सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान सीएनआई बॉयज इंटर कॉलेज में वाणिज्य शिक्षक के पद पर वैकेंसी निकाली गई थी। इस पद के लिए फरुखाबाद निवासी गेराल्ड जॉन ने भी आवेदन किया था।

मेरिट में रहे टॉप पर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गेराल्ड ने परीक्षा और इंटरव्यू क्लीयर कर लिया था। उनका नाम मेरिट लिस्ट में टॉप पर था। इसके बावजूद उन्हें नौकरी पर नियुक्त नहीं किया गया। जब उन्होंने इसको लेकर संबंधित विभाग से प्रश्न किया तब उन्हें बताया गया कि आपके पास स्टेनोग्राफी का कौशल नहीं है जबकि इस नौकरी की पात्रता के लिए उम्मीदवार के पास स्टेनोग्राफी का कौशल और प्रमाण पत्र अनिवार्य है।

इसपर गेराल्ड ने दावा किया कि नौकरी के लिए निकाले गए नोटिफिकेशन में किसी भी जगह स्टेनोग्राफी का जिक्र नहीं है। लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी।

स्कूल के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा

इसी तथ्य को आधार बनाकर गेराल्ड ने साल 1990 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में केस दर्ज कराया। साल 2000 में उत्तराखंड के निर्माण के साथ यह मामला नैनीताल हाई कोर्ट शिफ्ट हो गया। सालों-साल तक तारीखें चलती रहीं जिसपर अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है।

30 सालों बाद आया फैसला

जानकारी के अनुसार, 30 सालों तक चले इस मुकदमे में गेराल्ड की जीत हुई है। कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट के आदेशानुसार, 55 वर्षीय गेराल्ड को स्कूल में नियुक्त किया गया है साथ ही 80 लाख रुपये मुआवजा दिया गया है।

नौकरी के साथ मिला मुआवजा

गौरतलब है, उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में गेराल्ड को 73 लाख रुपये का भुगतान किया था। बाकी के 7 लाख रुपये यूपी सरकार करेगी। इसके अलावा अब वे स्कूल में कार्यवाहक प्राचार्य हो गए हैं।

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