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पढ़ाई में जीरो, खेल में अव्वल, जानिये ईशान किशन ने कैसे तय किया IPL तक का सफर

इंडियन प्रीमियर लीग 2022 के ऑक्शन में भारत के दूसरे सबसे महंगे खिलाड़ी बने ईशान किशन आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्हें मुंबई इंडियस ने 15.25 करोंड़ रुपये में खरीदकर टीम में शामिल कर लिया है। उन्हें उनके टेलेंट के दमपर यह स्थान प्राप्त हुआ है। आज हम आपको उनके जीवन से जुड़ी उन बातों के विषय में बताएंगे जिनके बारे में आपने पहले कभी नहीं सुना होगा।

बचपन से था क्रिकेट का शौक

बिहार के पटना में 18 जुलाई 1998 को एक बिल्डर के घर एक बाल का जन्म हुआ था जिसका नाम ईशान किशन रखा गया। इनक पिता प्रणव पाण्डेय का नाम बिहार के नामचीन बिल्डर्स में शुमार है। वहीं उनके भाई राज किशन क्रिकेट के स्टेट लेवल प्लेयर रह चुके हैं। ईशान को क्रिकेट की असली नॉलेज अपने भाई से ही मिली। वे बचपन से ही क्रिकेट की तरफ आकर्षित थे। उन्हें जैसे भी समय मिलता वे क्रिकेट खेलने के लिए चले जाते थे।

मां चाहती थीं डॉक्टर बने ईशान

उनकी मां सुचिता उन्हें पढ़ा-लिखाकर डॉक्टर बनाने का सपना देखती थीं लेकिन ईशान का मन ज़रा भी पढ़ाई में नहीं लगता था। यही वजह थी कि उन्हें पटना के दिल्ली पब्लिक स्कूल से निकाल दिया गया था।

हालांकि, इस बात का उनपर ज़रा भी असर नहीं हुआ। उनके पिता बताते हैं जब ईशान महज़ 2 साल के थे उस वक्त वे बैट-बॉल लेकर ही सोते थे। बताया जाता है कि सात साल की उम्र में ईशान ने अलीगढ़ में स्कूल वर्ल्डकप टूर्नामेंट में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व किया था। इस दौरान उनकी खूब सराहना हुई थी।

कोच संतोष कुमार से हुई मुलाकात

धीरे-धीरे वे आगे बढ़ते गए और क्रिकेट की प्रैक्टिस करते रहे। इसमें उनके भाई और पिता ने उनका पूरा साथ दिया जबकि उनकी माता उनके इस फैसले के खिलाफ थीं। बताया जाता है कि ईशान के पिता उन्हें मोइनुल हक़ स्टेडियमय ले जाया करते थे जहां वे जमकर प्रैक्टिस करते थे। यही उनकी मुलाकात कोच संतोष कुमार से हुई थी। ईशान को खेलता देख उन्होंने पहचान लिया था कि यह लड़का किसी दिन बड़ा प्लेयर जरुर बनेगा। इसलिए उन्होंने ईशान को ट्रेनिंग देना प्रारंभ किया। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि ईशान मौजूदा समय में सबसे फुर्तीले विकेट कीपर्स में से एक हैं। कोच संतोष ने उनकी तुलना भारतीय टीम के पूर्व कप्तान धोनी और एडम गिलक्रिस्ट से की थी।

रांची में जाकर छोड़ी छाप

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईशान के करियर में उस वक्त सबसे बड़ा बदलाव आया जब बीसीसीआई ने बिहार क्रिकेट एशोसिएशन की मान्यता रद्द कर दी थी। उस वक्त ईशान समेत अन्य खिलाड़ियों का सपना टूट गया था। इस दौरान उनके कोच संतोष कुमार ने उनका साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने ईशान को सलाह दी कि वे झारखंड जाकर रांची में होने वाले दूसरे टेस्ट में खेलें। उन्होंने अपने कोच की इस सलाह को माना और वे रांची के लिए रवाना हो गए। इसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दमपर सबसे पहले झारखंड की रणजी टीम में जगह बनाई। दिसंबर 2014 में असाम के खिलाफ ईशान ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 60 रनों की धुआंधार पारी खेली थी।

इसका नतीजा ये रहा कि साल 2015 में ईशान को अंडर-19 विश्वकप 2016 के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया था। इस दौरान उन्हें टीम का कप्तान भी नियुक्त किया गया था। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने अंत तक का सफर तय किया था। हालांकि, फाइनल्स में उसे वेस्टइंडीज से हार का सामना करना पड़ा था।

IPL 2018 में गर्दा उड़ा दिया

इसके बाद उन्होंने एक बार फिर घरेलू मैचों से शुरुआत की और एक के बाद एक रिकॉर्ड कायम किए। साल 2016 में उन्होंने दिल्ली के खिलाफ 273 रनों की शानदार पारी खेली थी जिसमें उन्होंने 21 चौके और 14 छक्के जड़े थे। यहीं से उनके करियर में एक बार फिर बदलाव आया। उन्हें इसके बाद आईपीएल खेलने का मौका मिला। गुजरात लायंस के हिस्सा रहे ईशान उस साल ज्यादा कुछ खास तो नहीं कर पाए थे। हालांकि, उन्होंने साल 2017 के आईपीएल में 11 मैच खेले थे जिलमें उन्होंने कुल 277 रन बनाए थे। साल 2018 में मुंबई इंडियंस ने उन्हें टीम में जगह दी थी। इस दौरान उन्होंने 14 मैचों में 275 रनों की शानदार पारी खेली थी।

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