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चिकित्सकों का नया कारनामा, कैंसर पीड़ित अध्यापक की जीभ काटकर लगाया हाथ का टिश्यू

तंबाकू, गुटका, बीड़ी, सिगरेट आदि मादक पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। यह बात हमें बचपन से ही समझाई जाती है लेकिन इंसान की फितरत होती है कि जिस चीज़ के लिए उसे रोका जाए वह उसी तरफ भागता है। वह वही करता है जिस चीज़ के लिए उसे रोका जाता है।

यही कारण है आज तमाम लोग कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बेंगलूरु से सामने आया है। दरअसल, यहां एक 52 वर्षीय अध्यापक को अचानक से बोलने और खाने-पीने में तकलीफ होने लगी। जिसके बाद उन्होंने डॉक्टर से मुलाकात की। कुछ टेस्ट हुए उसके बाद रिपोर्ट आई तो वह चौंकाने वाली थी।

बता दें, अध्यापक को जीभ का कैंसर था। जिसकी वजह से उसे बोलने और खाने-पीने में तकलीफ हो रही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ समय पहले अध्यापक को बोलने में तकलीफ हुई थी। जिसपर उसने बीजीएस ग्लेनीगल्स ग्लोबल अस्पताल अस्पताल के डॉ. कार्तिक प्रसाद से मुलाकात की। डॉ. प्रसाद ने सबसे पहले तो उसकी समस्या को सुना और समझा। उसके बाद उन्होंने उसके कई टेस्ट किए जिनमें सीटी स्कैन और बायोप्सी भी शामिल थे। इन टेस्ट्स की रिपोर्ट आने पर खुलासा हुआ कि अध्यापक को जीभ का कैंसर है। साइंटिफिक भाषा में कहें तो अध्यापक की जीभ पर स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा है।

जानकारी के मुताबिक, रिपोर्ट्स में हुए इस खुलासे से अध्यापक घबरा गया जिसपर उसने डॉक्टर्स से उसे बचाने की गुजारिश की। डॉक्टर्स ने उसे बताया कि इसके लिए ऑपरेशन करना होगा। वह तैयार हो गया।

बता दें, बीजीएस ग्लेनीगल्स ग्लोबल अस्पताल के डॉक्टर्स की टीम ने सबसे पहले अध्यापक की ग्लोसेक्टमी कर उसकी जीभ का 60 प्रतिशत हिस्सा बाहर निकाल लिया। इसके बाद एक प्लास्टिक सर्जरी के माध्यम से उसके बाएं हाथ के फ़्री फ़्लैप टिश्यू को निकालर कटी हुई जीभ की जगह पर लगाकर रिकन्सट्रक्टिव सर्जरी की।

डॉक्टरों के इस प्रयास से अध्यापक को नई ज़बान मिल गई। अब वह अपनी ज़बान से ठीक से बोल पाता है साथ ही खाने-पीने में भी दिक्कत नहीं है।

ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर्स की टीम को लीड करने वाले डॉ. प्रसाद ने बताया कि, ‘एक स्कूल टीचर के लिए बोलने की शक्ति खोना बहुत बड़ी दिव्यांगता है। हमारी मेडिकल टीम ने फ़्री फ़्लैप की मदद से जीभ रिकन्सट्रक्ट की जिससे मरीज़ को निगलने, बोलने और अपनी नौकरी आसानी से करने में मदद मिलेगी।’

गौरतलब है, चिकित्सकों की इस टीम में डॉ. कार्तिक प्रसाद, डॉ. नटराज नायडू, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नवीन कुमार, प्लास्टिक सर्जन, एनास्थेशिया, आईसीयू टीम और नर्सिंग स्टाफ़ शामिल था। इन लोगों की मेहनत ने अध्यापक को नया जीवन दे दिया।

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