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पंजाब की पसंद कभी अंग्रेजों की पसंद बन गई थी, विश्व युद्ध के दौरान ऑर्डर देकर भारत से मंगवाया गया था

सर्दियों का मौसम आते ही ठंड-ठंडी सर्द हवाएं चलने लगती हैं। सूरज की हल्की-हल्की किरण हमारे शरीर में गर्मी पैदा करती है। इसी के साथ शुरु होता है तमाम तरह के व्यंजनों का बनना।

सर्दियों के तमाम फायदे

britishers like indian sweets

दरअसल, भारत में सर्दियों का मतलब स्वादिष्ट भोजन की तैयारी होता है। कई लोगों को सर्दियां इसलिए भी पसंद होती हैं क्योंकि इस दौरान उन्हें अच्छे-अच्छे स्वादिष्ट पकवान खाने को मिलते हैं। वहीं, कुछ को सर्दियों का मौसम इसलिए भी भाता है क्योंकि उन्हें अच्छे-अच्छे कपड़े पहनने को मिलते हैं। देर तक सोने को मिलता है, दिन छोटा होने की वजह से उन्हें ज्यादा काम नहीं करना पड़ता है।

लेकिन इन सबमें सबसे अधिक मात्रा मिठाई पसंद करने वालों की अधिक होती है। उन्हें सर्दियों में गाजर का हलवा, गजक, गुड़ की चाय, पिन्नी आदि का स्वाद चखने का मौका मिलता है। लेकिन क्या आपको पता है कि एक वक्त ऐसा भी था जब भारत में ब्रिटिशों का राज था उस वक्त उन्हें भी भारत की मिठाईयों ने अपना गुलाम बना लिया था। जी हां, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान पंजाब की स्पेशल पिन्नियों ने अंग्रजों को काफी प्रभावित किया था।

युद्ध के लिए पहुंचे भारतीय सैनिक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान तकरीबन 1.5 मिलियन भारतीय नौजवानों को सेना में शामिल करके उन्हें जंग के लिए लंदन भेज दिया था। यहां उनके रहने-खाने से लेकर खेलने-कूदने तक की व्यवस्था की गई थी। बताया जाता है कि सैनिकों के लिए बिल्कुल घर जैसा माहौल तैयार किया गया था। उन्हें घर की याद ना सताए इसके लिए गीत, फिल्म, तेल, कंघा, शीशा आदि की व्यवस्था की गई थी।

सैनिकों ने की पिन्नी की मांग

हालांकि, मन तो मन होता है। सैनिकों को घर की याद सताती थी। जानकारी के अनुसार, लंदन के सिख समुदाय ने ब्रिटिश सरकार को चिट्ठी लिखकर एक खास मांग की थी। दरअसल, इस चिट्ठी में समुदाय की तरफ से कहा गया था कि सिख सैनिकों को उनके परिवार की याद आती है, इसलिए उनके खाने के लिए अंग्रेज़ी मिठाई की जगह भारतीय मिठाई, पिन्नी भेजी जाए।

घाटा पड़ने पर बंद की पिन्नी की सप्लाई

उनकी इस मांग को लंदन की कमेटी ने स्वीकार किया और भारत से हर महीनों कई कुंटल पिन्नी बन के भेजी जाने लगी। हालांकि, ब्रिटिश सरकार को यह सब काफी महंगा पड़ रहा था। इसलिए उन्होंने कुछ महीनों बाद इसे बंद कर दिया।

खीर बनवाने का किया फैसला

गौरतलब है, इसकी जगह अंग्रेजों ने एक खानसामे को लंदन भेज दिया। उसे आदेश दिया कि वहां जाकर भारतीय सैनिकों के लिए खीर बनाए। कुछ दिनों तक सब ठीक चला लेकिन ब्रिटिश सरकार को इसमें भी घाटा समझ में आया और उन्होंने इसे भी बंद कर दिया।

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