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अपने दोनो हाथ गवाने के बाद भी महिला ने कुछ कर दिखाया ऐसा,बनाई दुनिया में नई मिसाल

कई बार किसी के साथ ऐसा हादसा पेश आ जाता है.जिसे लोगों का हौसला पस्त हो जाता है.ये हादसे हमारी उड़ानों में बाधा डालते हैं.लेकिन कुछ लोग हादसे में शिकार होने के बाद भी अपनी हिम्मत नहीं हारते और अपने सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं.और आज हम ऐसे ही शक्ससियत के बारे में बात करेंगे जिन्होंने एक हादसे में अपने दोनो हाथ खोने के बाद भी अपने जीवन में हार नही मानी.और जीवन में कुछ कर दिखाया.हम बात रहे हैं l अय्यर की जिन्होंने अपने फौलादी इरादे के साथ लोगो के लिए एक प्रेरणा बनी.

ऐसे हुआ धमाक


दरअसल मालविका के साथ यह हादसा राजस्थान के बीकानेर शहर में आ था.मालविका कथक डांसर के रूप में अपना कैरियर बनाना चाहती थी.लेकिन मल्लिका जब साल 2002 में छोटी थी.और वह घर के बाहर खेल रही थी तो उनकी पैंट फट गई थी.मलिका ने खेल ही खेल में उस पैंट को फेविकोल से जोड़ना चाहा लेकिन एक पैंट फेविकोल से कहां हो जुड़ने वाली थी।फिर उनके चंचल मन में ख्याल आया की किसी भारी वस्तु से फटे हुए पैंट को दबाने से शायद पैंट चिपका जाए .काफी देर ढूंढने के बाद उन्हें कुछ नही मिला तो इन्होंने अपने घर के गैराज में से एक भारी वस्तु को उठा कर अपने कमरे में चली गई .मगर इसी बीच इतना जोरदार धमाका हुआ के दूर दूर के लोग भी सहम गए .इस आवाज को सुनकर मालविका के माता पिता भी कमरे में आएं. जहां उन्होंने देखा की उनकी बेटी मालविका खून से लत पथ होकर जमीन में लेटी हुई है.और कमरा पूरी तरीके से तहस नहस हो चुका था.

गवाने पड़े दो हाथ.


दरअसल मालविका ने अपने गैराज से जो भारी वस्तु उठाई थी .वह ग्रेनेड था.बता दें की मलिका के घर के आस पास में हथियारों का एक गोदाम था. जहां कुछ दिन पहले ही एक धमाका हुआ था.और धमाके के कारण आस पास के घरों में ग्रेनेड हवा में उड़कर आ गया था.और मालविका ने ग्रेनेड को अपने कमरे में उठा कर लाया था.जिसके कारण यह बड़ा हादसा हुआ था.और मलिका को इस छोटी सी गलती के कारण अपने दोनो हाथ गवाने पड़े थे.

अस्पताल में होना पड़ा था भर्ती


बात दें की इस जोरदार धमाके में मालविका को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था .और उस समय मालविका की शारीरिक नस ठीक तरीके से काम नही कर पा रही थी.जिसके कारण उन्हें 18 महीने अस्पताल में रहना पड़ा था.और इस दौरान उन्हों 9 वीं और 10वीं की पढ़ाई छोड़नी पड़ी.लेकिन हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने अपनी पढाई को पूरा करना चाहा,अगर मालविका की जगह कोई और बच्चा होता तो शायद वाह पूरी तरह से टूट जाता.लेकिन मालविका ने अपने हौसले को गिरने नहीं दिया.और हॉस्पिटल से निकलने के बाद उन्होंने बोर्ड की परीक्षा देने की ठानी.और स्टेट टॉपर बनी.उन्होंने 500 में से 483 अंक प्राप्त किया.उन्होंने इस परीक्षा के दौरान एक आदमी को चुना जो उनके लिए लिखे.

यूनाइटेड नेशंस ने किया आमंत्रित

मालविका को साल 2017 में यूनाइटेड नेशंस ने अपने न्यूयॉर्क स्तिथ हेडक्वार्टर में उन्हें स्पीच देने के लिए आमंत्रित किया था.मालविका ने यहां स्पीच देकर पूरे देश का नाम रौशन किया था.और मालविका को नारी शक्ति अवार्ड से देश में नवाजा जा चुका है.अब मालविका अय्यर की कहानी से उन सभी लोगों को सबक लेना चाहिए जो लोग अपनी जिंदगी में हर मान कर बैठे हुए है.मालविका सिर्फ देश की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है.

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